जब गांववासियों ने भाजपा विधायक को लगाई लताड़, कहा - वोट मांगने आये तो खैर नहीं!

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स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने आए विधायक को गाँव वालों ने लगाई फटकार, विधायक बनने के बाद गाँव पर ध्यान नहीं देने का लगाया आरोप

कोरोना की दूसरी लहर का कहर थोड़ा कम हुआ है और इसी के साथ जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने इलाकों का दौरा करना शुरू कर दिया है। हालांकि इस बीच उन्हें कई बार गुस्से का भी सामना करना पड़ा है। ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के झबरेडा से सामने आया है। जहां भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पहुंचे तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और उनके खिलाफ नारे लगाने लगे।
कहा जा रहा है कि भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल झबरेडा गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। जैसे ही देशराज स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे गांव के लोग जमा हो गए और विधायक पर गांव की उपेक्षा करने का आरोप लगाने लगे। यही नहीं गाँव वालों ने उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में गांव में प्रवेश भी नहीं करने की चेतावनी भी दी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बीजेपी विधायक देशराज कर्णवाल को एक ग्रामीण कहा, मात्र आपके पद का सम्मान करते हुये हम आपको छोड़ रहे है। यदि आप चुनाव के समय वोट मांगने आते है तो उसके लिए उनकी लाठी तैयार रहेगी। इसी धमकी के साथ लोगों ने विधायक को वहाँ से जाने के लिए कहा। 
बता दे कि भाजपा नेता कोरोना महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इलाके में घूम रहे थे और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे थे। इसी बीच उनके ही विधानसभा क्षेत्र के एक गांव के लोगों ने उन्हें घेर लिया और विधायक की खूब क्लास लगाई। जिस समय गाँव वाले विधायक को इतना कुछ कह रहे थे, उस दौरान पूरे समय विधायक उनको शांत करवाने का प्रयास ही करते रहे।
ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक बनने के बाद से देशराज ने गांव में कोई काम नहीं किया है। कोरोना काल में भी गांव में स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर कोई व्यवस्था नहीं है। रात में इलाज के लिए न कोई डॉक्टर है और न ही कोई व्यवस्था। नाली नहीं होने से सड़कों पर भी पानी भर जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक के पास लोगों के बीच जाकर उनकी समस्या सुनने और समाधान निकालने का समय नहीं है। इसलिए लोग भाजपा विधायक से नाराज हैं। विधायक आक्रोशित ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास करते रहे लेकिन ग्रामीणों ने उनकी एक नहीं सुनी।

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