इलाज में आए खर्च ने बदला हेल्थ इंश्योरेंस के प्रति रवैया: सर्वेक्षण

(Photo : IANS)

1 करोड़ से अधिक हेल्थ कवर लेने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी बढ़कर हुई 35 प्रतिशत

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)| हेल्थ केयर की सामान्य रूप से बढ़ती लागत और निजी अस्पतालों में कोविड के आसमान छूते खर्च ने स्वास्थ्य बीमा के प्रति भारत के रवैये को बदल दिया है। पॉलिसीबाजार के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अधिकांश उपभोक्ता 40 प्रतिशत तक ज्यादा सम इंश्योर्ड मनी वाली हेल्थ पॉलिसी की मांग कर रहे हैं। वे बड़े कवर वाली हेल्थ पॉलिसी खरीद रहे हैं।
1 करोड़ रुपये के हेल्थ कवर को लेकर बात करें तो उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई इन योजनाओं में उनकी हिस्सेदारी अब बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है। उसमें भी 1 करोड़ रुपये के हेल्थ प्लान लेने वालों में 31 से 40 साल की आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा 19 फीसदी हैं। इसके बाद 18-25 वर्ष की आयु के लोगों का शेयर 18 प्रतिशत है। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने को लेकर ग्राहकों में ईएमआई को तवज्जो देने का ट्रेंड भी बड़ा है, जो कि पहले न के बराबर था। 40 प्रतिशत ग्राहक भुगतान के लिए यही विकल्प चुन रहे हैं। आईआरडीएआई ने यह सुनिश्चित करके सराहनीय काम किया है कि सभी बीमाकर्ता ग्राहकों को ईएमआई का विकल्प दें।
वहीं क्लेम्स को लेकर बात करें तो सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चला है कि अप्रैल 2020 में क्लेम के कुल मामलों में से 4 फीसदी ही कोविड-19 संबंधित थे। हालांकि सितंबर तक यह अनुपात 40 प्रतिशत तक पहुंच गया था। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रमुख अमित छाबड़ा ने सर्वे के निष्कर्षों को लेकर कहा, "महामारी ने स्वास्थ्य बीमा के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम किया है। लोगों ने स्वास्थ्य को लेकर पैदा होने वाली अप्रत्याशित परिस्थितियों को लेकर इसके महत्व को महसूस किया है और अब हाई सम इंश्योर्ड प्लान में निवेश कर रहे हैं।"

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