इस बार खुल कर नवरात्रि के मूड़ में खैलेया, जोरों-शोरों से हो रही है तैयारी

(Photo Credit : sandesh.com)

दो साल बाद कोरोना प्रतिबंधों के बिना मनाई जायेगी नवरात्री

प्रथम देव गणपति के जाने के साथ ही भक्तगणों में आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना के पावन का इंतजार शुरू हो गया। दो साल से कोरोना प्रतिबंधों के बीच रुखी-सूखी बीती नवरात्रि में इस साल प्रतिबंधों में छुट मिलने से भक्तजनों में अधिक उत्साह है। उपर से अब इस पावन पर्व नवरात्री में आने में चंद दिन ही बचे है। ऐसे में कोरोना के दो साल बाद खिलाड़ियों में नवरात्रि को लेकर खासा उत्साह है। साथ ही पिछले छह माह से पूरे शहर में चल रही गरबा कक्षाओं में अब अंतिम दिनों में डेढ़ से दो घंटे का अभ्यास सत्र शुरू हो गया है। पेशेवर खिलाड़ियों और गरबा शिक्षकों के मुताबिक इस साल गरबा कक्षाओं में खिलाड़ियों की संख्या में एक तरफ 10 से 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, समाज में वृद्धि और शेरगरबा की प्रवृत्ति के साथ, व्यक्तिगत गरबा शिक्षक की मांग में भी वृद्धि हुई है।

गरबा की कक्षाओं में बढ़े गरबा-प्रेमी


आपको बता दें कि 26 सितंबर को सूद एकम के साथ रंगारंग नवरात्रि पर्व की शुरुआत होगी। इस वर्ष गणेशोत्सव उत्सव के दौरान शहर विशेष रूप से रंगीन रहा। उसके बाद से नवरात्रि पर्व के जश्न की तैयारियां चल रही हैं। खासकर पूरे शहर में चल रही गरबा क्लासेस में उनका उत्साह साफ नजर आ रहा है। पिछले दो वर्षों में कोरोना के कारण विभिन्न पाबंदियों के साथ नवरात्रि पर्व मनाया गया। इस बीच, इसका वाणिज्यिक नियोजन पर सीधा प्रभाव पड़ा। हालांकि इस साल कोरोना का ग्रहण हटने के बाद 6 महीने पहले शहर में गरबा कक्षाएं शुरू हो गई थीं। जिसमें पिछले तीन महीने में खिलाड़ियों की संख्या में 10 से 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि नवरात्रि गरबा वर्ग प्रबंधक के अनुसार सूरत में भी गरबा कक्षाओं की संख्या में इजाफा हुआ है। इस वर्ष लगभग 250 कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कुछ कक्षाएं जनवरी से शुरू हो चुकी थीं। जबकि खिलाड़ियों की संख्या जून से ही नजर आ रही थी। कक्षाओं में 200 से 1 हजार तक खिलाड़ियों की संख्या दर्ज की गई है।

पर्सनल गरबा टीचर की बढ़ी मांग


गरबा प्लानिंग के जिम्मेवार रूपेश वकील के मुताबिक, जैसे-जैसे नवरात्रि का त्योहार नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे व्यावसायिक स्पर्धाओं में खेलने जा रहे पेशेवर खिलाड़ियों को गरबा कक्षाओं में डेढ़ से दो घंटे तक बिना रुके अभ्यास किया जा रहा है। वहीं अब दूसरे दौर में भी डांडिया स्टेप का क्रेज देखने को मिल रहा है। खिलाड़ी दूसरे दौर में डांडिया खेलना पसंद करते हैं। साथ ही गली और समाज में गरबा आयोजन के बढ़ने के साथ ही निजी गरबा शिक्षक का भी क्रेज बढ़ा है। गली में 20 से 50 सदस्य एक साथ, समाज एक निजी गरबा शिक्षक लगाते हैं औरुनसे गरबा सीखते हैं।

शुरू होगी अंबाजी मंदिर की रथ यात्रा


शगरबा खेलने वाले रमतवीरों के साथ साथ हर के मंदिरों में नवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर शुरू हो गई हैं। जिसमें कोरोना का ग्रहण हटने के बाद कोट क्षेत्र के अंबाजी माता के पौराणिक मंदिर में पारंपरिक रथ यात्रा निकाली जाएगी। मंदिर की रथ यात्रा दो साल से नहीं हुई है। पिछले साल भी माताजी का विहार मंदिर परिसर में ही किया गया था। इस साल दशहरे पर अंबाजी मंदिर की रथ यात्रा शुरू की जाएगी। यह रथ यात्रा स्थानीय क्षेत्र में घूमेगी। मंदिर प्रशासकों के मुताबिक रथ यात्रा का रास्ता अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन दो साल बाद रथ यात्रा को निकालने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

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