सूरत : गुब्बारे बेचने वाले इन लोगों की मोडस ओपरेंडी जानकर आप चौंक जायेंगे!

प्रतिकात्मक तस्वीर

दिन में फुग्गे बेचने के बहाने करते थे रेकी और रात को करते थे चोरी, खेतों में बने घर को बनाते थे निशाना

पिछले 1 महीने से दक्षिण गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में लूटमार करने वाले मध्यप्रदेश के रतलाम और ग्वालियर जिले के खूंखार पारधी गैंग के 10 लुटेरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने सूरत शहर सहित 14 स्थानों पर लूटपाट की थी। अहमदाबाद, आणंद, खेड़ा, वडोदरा, नवसारी, मुंबई, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित कई स्थानों पर इस गैंग ने लूटपाट की थी। 
पुलिस ने बताया कि यह लुटेरी गैंग खेतों से सटे हुए घरों को निशाना बनाते थे, जो खेतों में अकेले बने घर में रहते थे। इसे पकड़ने के लिए बीते कई दिनों से पुलिस मेहनत कर रही थी। इस दौरान जानकारी के आधार पर क्राइम ब्रांच ने रतलाम के नंदू कन्हैया पारघी, दिनेश बने सिंह पारघी, बल्ला कन्हैया लाल भील, कालू बाला बामनी, राजकुमार चुन्नीलाल पवार, सिम्बा दुर्गा पवार, अर्जुन प्रेम सिंह सोलंकी तथा ग्वालियर के राजू बाला सोलंकी, विकास बाबला सोलंकी और उज्जैन के बापू सिंह को गिरफ्तार करके उनसे नकद 36000 तथा 1,48,498 की ज्वेलरी सहित घड़ियाल और माल सामान जब्त किए। इसके अलावा गेट खोलने और ग्रिल के तार काटने के लिए औजार भी जप्त किए गए थे। इस गैंग में महिलाएं भी शामिल थी। 
यह महिलाएं फुग्गा बेचने के बहाने सोसाइटी के बाहर खुले मैदान में घर बनाकर रहते थे। दिन में रिक्शे से और पैदल चलकर सोसाइटी और बंगले की रेकी करते थे। रिक्शेवाले से उस सोसायटी का नाम जान लेते थे और शाम को लॉकडाउन के पहले चोरी करने के लिए तय की गई बंगले के नजदीक खुले मैदान में रुक जाते थे। जहां की 1:30 से 4:30 बजे के बीच चोरी करते। हालाकि अभी तक इस गैंग के कुछ लोग भाग भागते फिर रहे हैं जिनमें की रुकेश, सुरेश पारघी, देव रुपा पारघी, सचिन बल्ला भील, गजराज मोन्टी नंदू पारघी और काला को वॉन्टेड घोषित किया गया है। 
बताया जा रहा है कि घर की खिड़की खोलने का काम राजकुमार देवा पारघी और गजराज तथा रूकेश चोटली करते थे। वह दरवाजे की कड़ी पाना और पेचकस की मदद से तोड़ देते थे जबकि अन्य आरोपी दिनेश, बल्ला, राजू सोलंकी, विकास, अर्जुन सिंबा बापू सिंह और मोंटू घर के बाहर रेकी करते थे। चोरी करने के बाद घर में जो रहता था वह जाकर खा पी कर खत्म कर देते थे और किचन का नाश्ता भी समाप्त कर देते थे। चोरी करते समय खेत के आसपास के मकान पसंद किए जाते थे और यदि कुत्ते भोंकते तो उन्हें भगाने के लिए गिलोल भी रखते  थे। लोगों को भगाने के लिए भी यह लोग गिलोल का इस्तेमाल करते थे लोगों को गुमराह करने के लिए यह चड्डी और बनियान पहन कर चोरी करने निकलते थे।

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