सूरत : कोरोना संबंधी नियंत्रणों से कपड़ा उद्योग की धीमी पड़ी चाल

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : rvv.co.in)

1000 रेपियर लूम्स मशीनें हुई बंद, 25 प्रतिशत प्रोसेसिंग यूनिट में भी काम नही; सूरत सहित अन्य राज्यों में भी कपड़ों की मांग घटने से परेशान कपड़ा उद्यमी

कोरोना के मामले लगातार बढने के कारण सूरत के कपड़ा बाजार में 5 मई तक बंद करने का निर्णय किया गया है। इस कारण बचा-खुचा व्यापार भी समाप्त हो गया। दूसरी ओर यूपी, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र मे भी मिनी-लॉकडाउन जैसी स्थिति हो गई है, जिससे शहर का कपड़ा उद्योग  बुरी तरह से प्रभावित होगा। अन्य राज्यों में रिटेल में व्यापार कमजोर होने के कारण सूरत के व्यापारियों को ऑर्डर और पेमेन्ट नहीं मिल रहा हैं। टेक्सटाइल मिलों के 25% और रैपियर जैकॉर्ड की 1000 से अधिक मशीनों को बंद कर दिया गया है और उनके कारीगरों को वापस भेजा जा रहा है।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, यूपी समेत कई राज्य कोरोना की दूसरी लहर शूरू हो चुकी हैं। प्रतिदिन लाखों कोरोना मामले सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र में 15 मई तक लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश और यूपी सहित अन्य राज्यों में भी मिनी-लॉकडाउन चल रहा है। गुजरात में 5 मई तक कपड़ा बाजार बंद है। अधिकांश राज्यों में रिटेल मार्केट बंद हो गए हैं। जहां खुला है, वहां व्यापार 10 से 15 प्रतिशत पर बना हुआ है। इसका असर कपड़ा बाजार पर पड़ा है। 
सामान्य दिनों में सूरत में प्रतिदिन 2.50 करोड़ मीटर कपड़ा का उत्पादन होता है, जो अन्य राज्यों में भेजा जाता है, लेकिन पिछले एक महीने में मांग 80 से 85 प्रतिशत तक कम हो गई है।  नए  ऑर्डर नहीं मिल रहे। पुराने ऑर्डर भी रद्द करने पड़े है। व्यापारियों का कहना है कि अन्य राज्यों से पेमेन्ट भी नही आ रहा है। इसलिए व्यापारी, विवर्स और प्रोसेसरों की हालत गंभीर हो गई है।
शहर में 10,000 से अधिक रैपियर जैकॉर्ड मशीनें हैं। इनमें से एक हजार मशीने बंद है। कपड़ा बाजार बंद होने के कारण अब इनमें से कई यूनिटें बंद होने के कगार पर हैं। सचिन विवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र रामोलिया ने कहा कि मार्केट बंद होने से ऑर्डर नहीं मिल रहा है। माल का स्टोक करना पड़ रहा है। इसलिए, अकेले सचिन जीआईडीसी में, लगभग 1 हजार रैपियर जैक्वार्ड मशीनों को बंद कर दिया गया है। कारीगरों को टिकिट देकर घर भेजा गया।
साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के जीतू वखारिया ने कहा कि एक ओर सूरत में कपड़ा मार्केट बंद और अन्य राज्यों में लॉकडाउन जैसे माहोल से सूरत में मिलों पर असर पड़ा है। 350 में से केवल 60 मिलें 25 फीसदी जॉबवर्क पर चल रही हैं। अन्य मिलें सप्ताह में 3 से 4 दिन बंद है। लगभग 25 प्रतिशत डाइंग मिलें बंद हो चुकी है।
लॉकडाउन के कारण शो रूम संचालको की हातल पतली हो गई है। शहर के भटार, लालगेट, घोडदोड रोड, पीपलोद सहित कई क्षेत्रों में रेडीमेड गारमेन्ट के शो-रूम है। इस बार कोरोना के कारण लग्न केन्सिल होने से उनके व्यापार पर असर पड़ा था। थोडा बहुत व्यापार चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन लग जाने के कारण वह परेशान हो गए हैं। उनका कहना है कि शो-रूम का टर्नओवर 10 लाख से करोडो रुपए का है लेकिन लॉकडाउन के कारण बिल्कुल ठप्प हो गया है। उन्हें श्रमिकों का वेतन, किराया, लाइटबिल आदि देने में भी दिक्कत हो रही है।

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