सूरत : कोरोना के सुधरते हालातों का संकेत, निजी अस्पतालों में सरकारी क्वोटा बंद हुआ

प्रतिकात्मक तस्वीर

सरकारी अस्पतालों में कोरोना के मरीजों के लिए पर्याप्त बेड होने के कारण बंद किए गए रिजर्व क्वोटा

सूरत शहर में कोरोना की दूसरी लहर कम होती दिखाई दे रही है। दूसरी लहर के कारण अस्पतालों में जो बेड, ऑक्सीज़न, वेंटिलेटर, दवा तथा इंजेक्शन से लेकर श्मशान भूमि में लगी लंबी लाइन और अफरातफरी हुई थी, वह कम होने लगी है। महामारी के दूसरे वेव से लड़ने के लिए अस्पतालों में मरीजों को बेड कम ना पड़े इसके लिए पालिका द्वारा 149 निजी अस्पतालों में 50 प्रतिशत क्वोटा रिजर्व किया गया था। जो की गुरुवार से बंद होने जा रही है। 
बता दे की कोरोना के मरीजों को समय से इलाज मिले इसके लिए सरकार द्वारा शहर की निजी अस्पतालों में 50 प्रतिशत क्वोटा रिजर्व रखने का आदेश दिया गया था। जिसके लिए अप्रैल महीने में 114 जितनी अस्पतालों के साथ सरकार ने करार भी किया था। इन सभी में से 90 डेजीगनेटेड अस्पतालों में से 60 से 70 अस्पतालों में पालिका के रिजर्व क्वोटा के मरीज दाखिल किए गए थे। दूसरी लहर के दौरान पालिका ने कुल 1895 मरीजों का निजी अस्पताल का खर्च खुद उठाया था। हालांकि अब केसों की संख्या कम हो रहे है। इस परिस्थिति को देखते हुये पालिका द्वारा अस्पतालों में 50 प्रतिशत रिजर्व क्वोटा बंद करने का निर्णय लिया गया है। म्युनिसिपल कमिश्नर बंछानिधि पानी ने इस बात की जानकारी डी थी। 

बता दे की शहर में घट रहे केसों को देखते हुये पालिका ने लोगों के घर-घर जाकर लोगों का कोरोना टेस्ट करने वाले संजीवनी रथ की संख्या भी कम कर डी है। जहां अप्रेल महीने की शुरुआत में शहर भर में 212 संजीवनी रथ दौड़ रहे थे। वहीं अब मात्र 149 रथ ही काम कर रहे है। कोरोना की दूसरी लहर दौरान पालिका ने भी कई मुश्किलों का सामना किया। ऑक्सीज़न की डिमांड से लेकर मरीज के बेड की उपलब्धता के प्रश्न तक की सभी परेशानियाँ खड़ी थी। हालांकि इन सभी की व्यवस्था करने के लिए तंत्र द्वारा कोई भी कमी नहीं होने दी गई। रेकॉर्ड के अनुसार, दूसरी लहर के दौरान वेंटिलेटर, दवा, इंजेक्शन, बेड सहित की चीजों को खरीदने के लिए 50 करोड़ से भी अधिक का खर्च हुआ है। 

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