सूरत :नर्मदा जिले के छोटे से गांव में सुपोषित संगीनी की मदद से बालविवाह रोकने में मदद मिली

सुपोषित संगीनी अपने क्षेत्र में सामाजिक कुप्रथा को तोडने का प्रयास कर रही है

जब एक महिला दूसरी महिला के बगल में खड़ी हो, अपनी ओर से लड़ रही हो, तो वहीं सच्ची महिला होती है।

एक औरत के मुश्किल समय की "संगिनी" बनकर उन्होंने एक कुप्रथा को तोड़ा!
पूरे भारत में बाल विवाह की अफवाह फैल रही है गुजरात कोई अपवाद नहीं है। नर्मदा के आदिवासी इलाके में भी कुछ ऐसा ही होने वाला था। मगर अंतर यह है कि इस समस्या के बीच एक महिला ने दूसरी महिला की परेशानी के दौरान "संगिनी" बनी और अपने परिवार को यह गलती करने से रोका।यह कहानी है नर्मदा जिले के नांदोद क्षेत्र के गाडित गांव की। अमीषा जेसलभाई वसावा 17 साल की थीं। पिता मजदुरी करते है मां घरकाम करती है। अमिषा एसएससी परीक्षा में फेल हो गई और उसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। 
फिर "एक जवान लड़की को घर पर कैसे रखें!" 17 साल के बच्ची की शादी करने का फैसला किया गौरतलब है कि अमिषा की सगाई दो साल पहले हुई थी। उसका परिवार बालविवाह करने जा रहा था।  
सुपोषित संगीनी रेखाबेन पिछले तीन सालों से अदानी विल्मार की सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) टीम के साथ जुडी है
ऐसे में सुपोषित "संगिनी" रेखाबेन वसावा को इस बात का पता चला। रेखाबेन पिछले तीन सालों से अदानी विल्मार की  सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) टीम के साथ जुडी थी। सुपोषण संगीनीओ द्वारा महिलाओं और  नाबालिगों और बच्चों में कुपोषण को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने का काम किया जाता है। साथ ही उन्हें पोषणयुक्त  आहार लेने की भी जानकारी देते है। 
सुपोषण संगीनी रेखाबेन अच्छी तरह से जानती थी कि नाबालिग युवति की शादी होने के बाद गर्भवती होने की संभावना बढ़ती है, ऐसी स्थिति गर्भवती मां बच्चे में कुपोषण का कारण बन सकती है।
यही कारण है कि भारत सरकार ने हाल ही में भारत में युवा महिलाओं की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आदिवासी इलाके में जनता को राजी करना लोहे के चने चबाने जैसा है।  हालांकि रेखा ने  हिम्मत नहीं खोई फिर भी वह सगीर अमिषा के परिवार वालों को मनाने लगी, और इस बाल विवाह को रोकने के लिए  प्रयास शुरू किए। रेखाबेन यहीं नहीं रुकीं उन्होंने सगाई की
वहां ससुराल वालों से भी बात की। और नाबालिग से शादी न करने की जानकारी दी। साथ ही गांव के बुजुर्गों ने भी आपस में बातचीत की। आखिरकार, उनके प्रयास रंग लाए और अमिषा की मां सही उम्र में शादी करने के लिए राजी हो गई।  इस प्रकार अमिषा का बाल विवाह रुका और वह फिर से स्कूल जाना शुरू किया और 12वीं की परीक्षा दे रहा है।
इसके अलावा  ब्यूटी पार्लर के बेसिक्स भी सीखे हैं। रेखाबेन  की मदद से कुल 21 कम उम्र की शादियों को रोका गया है। इस प्रकार इन सभी महिलाओं ने अपने स्तर पर अद्भुत काम किया है और स्वस्थ भारत के विकास में भी योगदान दिया है।

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