सूरत : भाई ने ही बेचा बहन का घर, लोन के पैसे लेकर रफूचक्कर हुआ

प्रतिकात्मक तस्वीर

बैंक द्वारा संपत्ति की नीलामी के लिए नोटिस जारी करने के बाद आखिरकार चचेरे भाई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई

शहर में एक और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है जहाँ एक भाई ने ही अपनी बहन का घर बेच दिया। मामले में एक चचेरे भाई ने अपनी बहन के घर पर 78 लाख रुपये और साथ-साथ अन्य ऋण मिलाकर कुल 1.04 करोड़ रुपये की चार कढ़ाई मशीनें लेने के लिए कर्ज ले कर उसे बेचने का धोखाधड़ी किया। बैंक द्वारा संपत्ति की नीलामी के लिए नोटिस जारी करने के बाद आखिरकार चचेरे भाई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वराछा मिनी बाजार के पास शिवशंकर पार्वती सोसायटी में रहने वाली गीताबेन भरतभाई डोंडा समाजसेवा करती हैं। उनके चचेरे भाई और बड़े भाई अशोकभाई मियां साल 2019 में आए और बहन को पैसों का लालच देकर साझेदारी में एम्ब्रोडरी मशीन शुरू करने के लिए कहा। बहन के मना करने बहाने से अशोक ने बहन को समझाया और उसे लोन लेने के लिए उकसाया। लोन लेने के बाद गीताबेन ने माधवी क्रिएशन के नाम से एक बिजनेस शुरू किया। गीताबेन ने घर के लिए 78 लाख रुपये का कर्ज लिया था, इसके अलावा 15 लाख रुपये का एक और कर्ज लिया था। जिसमें से कुल 1.04 करोड़ रुपये की कढ़ाई वाली चार मशीनें खरीदी गईं। 78 लाख रुपये के अलावा, गीताबे ने अपने व्यक्तिगत ऋण से 4.15 लाख रुपये, अपने पति से 1.50 लाख रुपये और अपने बेटे और बहू से ऋण और फ्लैट बेचकर 9.80 लाख रुपये प्राप्त किए। उन्होंने वराछा उमिया माताजी के मंदिर के पास व्यापार करना शुरू किया।
शुरुआत में जब उन्होंने गीताबेन से पैसे मांगे तो अशोकभाई ने कहा, ''अब कारोबार शुरू होने में अभी छह महीने लगेंगे। दो-तीन महीने बाद जब गीताबे ने फिर पैसे मांगे तो लॉकडाउन आ गया और धंधा बंद हो गया। इस बीच गीताबे ने पैसे मांगना बंद कर दिया था। लॉकडाउन खुलने के बाद उन्होंने फैक्ट्री को अश्विनी कुमार के पास शिफ्ट कर दिया। आखिरकार, एक पुलिस शिकायत दर्ज की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि गीताबेन की कढ़ाई वाली मशीनें बिक चुकी हैं।
इसके बाद कर्ज के पैसे लेने गीताबेन अशोक के घर गई लेकिन घर पर अशोक नजर नहीं आया। घटना के बारे में बताने के लिए गीताबेन बैंक गई थीं। एजेंट महेंद्रभाई के साथ अशोक मियां भी थे। एजेंट की गवाही में अशोकभाई ने कहा, 'मैं समय पर किस्त का भुगतान करूंगा। तब भी अशोकभाई ने रुपया नहीं दिया। अश्वनी कुमार में गीताबे का निरीक्षण करते हुए कारखाने के मालिकों ने कहा, ''हमने मशीन खरीदी और बेची है और हम किराए पर फैक्ट्री चलाते हैं।''
बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अशोकभाई ने रुपये का भुगतान नहीं किया। फैक्ट्री भी किसी और के स्वामित्व में थी और यूनियन बैंक द्वारा गीताबेन के प्लॉट और उनके घर की नीलामी के लिए नोटिस जारी किया गया था। नोटिस निकलते ही गीताबेन अशोकभाई के पास पहुंची, लेकिन तभी अशोकभाई की पत्नी ने कहा कि वे मशीनें बेच कर भाग गए हैं। आखिरकार मामले की शिकायत की गई।

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