सूरत : स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने वाली ९९ वर्षीय मणिबेन कभी मतदान करने से नहीं चुकतीं!

पिछले दिनों स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के लिये जाते हुए ९९ वर्षीय मणिबेन।

गुजरात में हुए नगरपालिका और जिला पंचायतों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मैदान मार लिया है।

गुजरात में हुए नगरपालिका और जिला पंचायतों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने मैदान मार लिया है। शहर हों या गांव, हर जगह केसरिया लहराया है। राजनीति रूप से देखें तो केवल सूरत के एक इलाके में आम आदमी पार्टी के २७ पार्षदों ने मैदान मारा है, जिसे पाटीदार समुदाय के राजनीतिक बल का प्रभाव माना जा रहा है। कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया है। इक्का-दुक्का जगहों पर उसके उम्मीदवार जीते हैं। खैर, इस राजनीतिक चर्चा से उलट आज हमें बात करनी है लोकतंत्र के पर्व या चुनाव में मतदान के प्रति बुजुर्गों का जोश। 

९९ वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी ने किया था मतदान

जी हां, आजादी के जंग में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने वाली स्वतंत्रता सेनानी ९९ वर्षीय मणीबेन बापूभाई घोड़िया पटेल ने विगत दिनों  रविवार को अपना मतदान करके लोकशाही के पर्व में अपना योगदान दिया था।  99 साल पूरा कर के 100वें साल में प्रवेश करने वाली मणाबेन ने इस मौके पर अपने संदेश में कहा था कि गुलामी की जंजीरों में से मुक्त होने के लिए देश को कई स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी देनी पड़ी। इसके बाद यह कीमती आजादी मिली है। इसलिए सभी को चाहिए कि वह लोकशाही के महापर्व यानी कि मतदान के दिन अपना मत देकर देश के विकास में अपना योगदान अदा करते रहना चाहिये। 

1942 में विदेशी कपड़ों के खिलाफ की थी पिकेटिंग

मणीबेन ने मीडिया से बातचीत में मतदन के बाद पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा था कि 1942 में विदेशी कपड़े की बिक्री करने वाले दुकानदारों के यहां पिकेटिंग करते समय ओलपाड से मेरे और  हमारे समूह की चार अन्य महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। तब मैं 20 साल की थी। कोर्ट ने मुझे 6 महीने की सजा दी थी। लेकिन जेल भरो आंदोलन के कारण साबरमती जेल में बड़ी संख्या में लोग आ जाने से हमें 2 महीने में ही छोड़ दिया गया।

बता दें कि मणीबेन प्रत्येक चुनाव के दौरान मतदान के दिन अपना मत देना नहीं भूलती हैं और साथ ही वह अपना दैनिक काम भी करती हैं। उनके परिवार जनों का कहना है कि वह शांति से घर पर रहें, लेकिन मणिबेन कहती है कि काम करते रहूंगी तो शरीर हल्का फुल्का बना रहेगा। मणिबेन का उदाहरण देश के नए मतदाताओं के लिए उदाहरण के समान है जो कि उन्हें मतदान करने के लिए प्रेरित करेगा।

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