रतन टाटा की इस कंपनी में 104 सालों बाद कोई बनने जा रहा सीईओ, अब तक कंपनी में नहीं था कोई पद

प्रस्तावित योजना के तहत, सीईओ 153 साल पुराने टाटा समूह को कारोबार के लिए निर्देशित करेगा

क्या आपने कभी सुना है कि किसी बड़ी कंपनी के पास सालों तक कोई सीईओ ही नहीं हो? क्या ऐसा हो सकता है कि कोई बड़ी कंपनी कई वर्षों तक बिना बड़े अधिकारी के संचालित हो? जी हाँ, सही सुन रहे है आप। देश की एक ऐसी ही बड़ी जानीमानी कंपनी है जिसके पास सालों तक कोई सीईओ नहीं था। हम बात कर रहे है टाटा समूह को नियंत्रित करने वाली टाटा संस की। इस कंपनी को अब 104 वर्षों में पहली बार सीईओ मिल सकता है।
दरअसल इस कंपनी के नेतृत्व ढांचे को पुनर्गठित किया जा रहा है और शासन मानकों को संशोधित किया जा रहा है। इसके तहत कंपनी में सीईओ के पद पर विचार किया जा रहा है।  ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। प्रस्तावित योजना के तहत, सीईओ 153 साल पुराने टाटा समूह को कारोबार के लिए निर्देशित करेगा, जबकि अध्यक्ष शेयरधारक से सीईओ के संचालन की देखरेख करेगा। ब्लूमबर्ग के  सूत्रों की माने तो लीडरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव के लिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन रतन टाटा की मंजूरी को अहम माना जा रहा है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी में खत्म हो रहा है लेकिन उन्हें एक्सटेंशन देने पर विचार किया जा रहा है। सीईओ की पोस्ट के लिए टाटा स्टील लिमिटेड सहित टाटा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के प्रमुखों के नाम पर विचार चल रहा है। इस बारे में अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और इसके प्लान तथा डिटेल में बदलाव हो सकता है।
आपको बता दें कि सेबी की सिफारिशों के अनुरूप टाटा ग्रुप की लीडरशिप में बदलाव की योजना है। सेबी के अनुसार बेहतर कामकाज के लिए देश की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में अप्रैल 2022 तक चेयरमैन और सीईओ अलग-अलग होना चाहिए। हालांकि टाटा संस लिस्टेड कंपनी नहीं है लेकिन बदलाव से उसे इस नियम के अनुपालन में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप 100 से अधिक बिजनस करता है और उसकी लिस्टेड कंपनियों की संख्या 2 दर्जन से अधिक है। 2020 में ग्रुप का कंबाइंड सालाना रेवेन्यू 106 अरब डॉलर था। टाटा ग्रुप के कर्मचारियों की संख्या 750,000 है।
गौरतलब है कि वर्तमान समय में 10 अरब डॉलर का कर्ज झेल रही टाटा स्टील जबकि लगातार तीन साल से घाटे में चल रही टाटा मोटर्स ग्रुप के नए सीईओ को कई तरह की चुनौतियों से निपटना होगा। इसके साथ ही डिजिटल स्पेस में बिजनेस बढ़ाने की कंपनी की योजना अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई है। टाटा ग्रुप के पास टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के रूप में एशिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर है लेकिन ई-कॉमर्स बिजनस के लिए सुपरऐप लॉन्च करने की उसकी योजना अब तक सफल नहीं हो पाई है।

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