राजकोटः समरस में पुस्तकों के साथ मनोवैज्ञानिक प्रयोग उपचार में एक नया आयाम जोड़ेगाःनीलधारा राठौड़

नीलधारा राठौड़ ने समरस कोविड केयर सेन्टर में सकारात्मक विचारों वाला पुस्तक वितरण किये

एम.एस. डब्ल्यु. की टीम द्वारा अभिनव प्रयोग: 600 से अधिक पुस्तकों द्वारा मरीजों को सकारात्मक विचारों के साथ मनोवैज्ञानिक पहल

आध्यात्मिक, धार्मिक, सकारात्मक सोच, उपन्यास और कहानियों की पुस्तकें मरीजों के सच्चे दोस्त बन गए
 कोरोना रोगियों को ऑक्सीजन की उपचार के साथ-साथ सकारात्मक विचार से मनोबल को मजबूत करने के लिए समरस डेडीकेटेड कोरोना हेल्थ केयर सेन्टर एक पुस्तक उत्सव शुरू किया गया है। 600 से अधिक विविध कैटेगरी के पुस्तके मरीजों  को नई सकारात्मक विशिष्ट ऊर्जा प्रदान करेंगी। यह कहना है पुस्तक उत्सव के प्रणेता व मनोचिकित्सक सामाजिक कार्यकर्ता एवं समरस में एम.एस. डब्ल्यू टीम के प्रमुख नीलधारा राठौर का। 
अहमदाबाद सिविल कोविड अस्पताल में एक साल से अधिक समय से सेवा दे चुके नीलधारा समरस में पुस्तक प्रयोग शुरु करने के संदर्भ में कहा कि  मरीजों को मनोवैज्ञानिक  सांत्वना (आश्वासन) प्रदान करने के लिए समरस में पहले वीडियो कॉलिंग और परामर्श की सुविधा शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि हमने जिला कलेक्टर  रेम्या मोहन से बात की कि वे मरीजों को किताबों से सकारात्मक विचारों में उलझाए रखें ताकि मरीजों में कोई निराशा या नकारात्मक रवैया न रहे और कोई अप्रिय घटना न घटे। जिस पर कलेक्टर के साथ-साथ अपर कलेक्टर मेहुल दवे ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और हमारी टीम ने प्रांतीय अधिकारी  चरण सिंह गोहिल और समरस के डॉक्टरों द्वारा यह काम शुरू किया।
अहमदाबाद स्थित मेंटल हेल्थ फॉर सिविल (पीएसडब्ल्यू), अर्पण नायक के साथ-साथ संगठनों और दानकर्ताओं द्वारा दान की गई पुस्तकों को राजकोट सिविल के साथ-साथ समरस में भी लाया गया है। हम रोगियों के रुच‌ि के अनुसार आध्यात्मिक, धार्मिक, सकारात्मक सोच, उपन्यास और कहानियों पर विभिन्न पुस्तिकाएं प्रदान करते हैं। परिणाम स्वरुप रोगियों ने  अपना समय  अन्य विचारों में  बिताने के बजाय वे अब पुस्तक पढ़ने की गतिविधियों में लगे हुए हैं। परिणामस्वरूप, उनका दिमाग कोरोना के विचारों से दूसरे दिशा में मुड़ गया, जिससे उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आएगा। ऐसी उम्मीद नीलधारा और उनकी टीम ने व्यक्त की है। 
ऐसा कहा जाता है कि एक अच्छी किताबें सौ दोस्तों की ज़रूरत को पूरा करती है।  यहाँ तो 600 से अधिक किताबें मरीजों की सच्ची दोस्त बनने वाली हैं। वर्तमान में समरस में डॉ. मेहुल परमार, डॉ. केतन पिपलिया, डॉ. जयदीप भुंडिया की अध्यक्षता में कोरोना से जूझ रहे 1,000 से अधिक रोगियों के साथ, यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि पुस्तकों के साथ मनोवैज्ञानिक प्रयोग उपचार में एक नया आयाम जोड़ेंगे।

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