राजस्थान के भाजपा मुख्यालय में पार्किंग पर प्रतिष्ठा की जंग

(File Photo: IANS)

मंगलवार को जहां खासी मशक्कत के बाद 2 प्रमुख नेताओं - वसुंधरा राजे और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को साथ लाने की कोशिशें कामयाब होते दिखीं थीं, तभी एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने अब तक के किए कराए पर पानी फेर दिया।

जयपुर, 24 फरवरी (आईएएनएस)| राजस्थान में जहां भारतीय जनता पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ एकजुट दिखने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्किंग से जुड़े एक छोटे से मसले ने बड़ी गड़बड़ी कर दी है। मंगलवार को जहां खासी मशक्कत के बाद 2 प्रमुख नेताओं - वसुंधरा राजे और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को साथ लाने की कोशिशें कामयाब होते दिखीं थीं, तभी एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने अब तक के किए कराए पर पानी फेर दिया। दरअसल, मुख्यालय में जब राजे के ड्राइवर और टीम ने पूनिया के ड्राइवर से उनकी गाड़ी को पोर्च से हटाने के लिए कहा, तो पूनिया की गाड़ी वहां से नहीं हटाई गई और इसके बाद राजे चुपचाप ऑफिस के अंदर चलीं गईं। फिर उनकी गाड़ी को कार्यालय के पीछे पार्क करना पड़ा। बैठक से बाहर आने के बाद वह फिर से अपनी गाड़ी में चली गईं।

भाजपा के अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया, "मैडम (राजे) हमेशा अपनी गाड़ी को पोर्च में पार्क करती हैं, भले ही पार्टी का अध्यक्ष कोई भी रहे। पिछली बार जब वह पार्टी कार्यालय में आई थीं, तब पूनिया की गाड़ी हटाकर उनकी गाड़ी पार्क की गई थी। लेकिन यह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में अपनाई जाने वाली प्रथा से अलग है। वहां पार्टी ऑफिस में कोई भी आए, लेकिन पोर्च में गाड़ी केवल पार्टी अध्यक्ष की ही पार्क होती है।"

उधर बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब राजस्थान प्रभारी अरुण सिंह से राजे की प्रस्तावित 'शक्ति यात्रा' के बारे में सवाल पूछे गए तो उन्होंने इस बारे में जानकारी न होने की बात कही। राजे की यह यात्रा उनके जन्मदिन पर 8 मार्च से भरतपुर से शुरू होने की खबरें हैं। बता दें कि बीते 6 महीनों से राजे पार्टी कार्यालय से दूरी बनाए हुए हैं।

भाजपा अधिकारियों का कहना है राज्य में नई भाजपा टीम आने के बाद वह खुद को साइडलाइन किए जाने से नाखुश हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें