जानें किस तरह बनी बालाजी वेफ़र्स 10 हजार करोड़ रुपये की कंपनी

(Photo Credit : bajaliwafers.com)

चंदुभाई विराणी की सफलता की कहानी है काफी प्रेरक, घर से शुरू किया था काम

नमकीन की टेस्टी दुनिया में राजकोट की बालाजी वेफ़र्स ने पेप्सीको जैसी विदेशी कंपनियों को भी थका रखा है। मालिक चंदुभाई विराणी की कठिन परिश्रम के कारण आज उनकी कंपनी ने 10 हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया है। हालांकि इसके बावजूद वह जमीन से जुड़े रहे है। आज भी उनके स्वभाव में सौम्यता है। अरबपति होने के बावजूद आज भी अपने मित्रों और स्वजनों के साथ शादी में गरबा-रास खेलने में वह जरा भी संकोच नहीं करते। 
चंदुभाई कहते है की वह नाज भी अपने दोस्तों के साथ संपर्क में है। बचपन में वह अपने मित्रों के साथ नदी किनारे खेलने जाते थे और वहाँ पेड़ पर चढ़ने की शर्त लगते थे। आज भी जब उनके दोस्त राजकोट आते है, तो बिना उनसे मिले नहीं जाते। चंदुभाई भी अपने मित्रों के यहाँ होने वाले छोटे-मोटे प्रसंग में अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज करवाते है। वह शादी में होने वाले रास-गरबा में भी बिना संकोच के शामिल हो जाते है। गाँव में जिस तरह काठियावाडी रास खेला जाता है, उसी तरह उनको भी खेलते देख कई लोग आश्चर्यचकित रह जाते है। 
चंदुभाई का जन्म जामनगर के कालावाड़ में आए धुन-धोराजी गाँव में हुआ था। उनके पिता किसान थे। जब कुछ समय तक वहाँ बारिश नहीं हुई, तो पिता ने खेत बेच कर 20 हजार रुपए भाइयों को कुछ नया व्यापार करने के लिए दे दिया। पर भाइयों की अनुभवहीनता को देख उन्हें लोगों ने नकली माल पकड़ा दिया और सभी भाइयों के पैसे डूब गए। इसके बाद उन्होंने 1982 से घर से ही वेफ़र बनाना शुरू किया। शुरुआत में लोग जल्दी इस तरह से वेफ़र नहीं खाते थे। पर धीरे धीरे उनका व्यापार बढ़ा और आसपास की दुकानों में उन्होंने सप्लाई शुरू की। इसके बाद धीरे-धीरे शहर भर में उनके वेफ़र्स बिकना शुरू हुये। 
धीरे धीरे उनकी बिक्री बढ्ने लगी इसलिए 1989 में उन्होंने आजी GIDC में जगह ली और बेंक लोन लेकर प्रोडकशन शुरू किया। इसके बाद साल 1992 में ओटोमेटिक प्लांट बनाया। इसके बाद आज उनके और उनके भाइयों की संतान नई-नई टेक्नोलोजी और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाकर उनके बिजनेस को आगे बढ़ा रहे है। 
बालाजी परिवार के साथ फिलहाल लगभग 5000 कर्मचारी जुड़े हुये है। पर चंदुभाई उन्हें अपने घर का सदस्य मानते है। वह कहते है की स्टाफ को कभी भी आपके सामने कुछ मांगना पड़े ऐसा होना ही नहीं चाहिए। यदि कर्मचारी आपके पास आकर कुछ मांगता है, इसका मतलब कहीं न कहीं आप में कोई कमी रह गई है। 
बालाजी वेफ़र्स ग्रुप महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल है। कंपनी के स्टाफ में 70 प्रतिशत महिलाएं है। चंदुभाई कहते है की पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं में एकाग्रता अधिक होती है। वैसे भी भारतीय संस्कृति में महिलाओं को रसोई की रानी कहा जाता है। इसलिए ही वह अपनी कंपनी में महिलाओं को अधिक काम देते है। 
कुछ ही समय पहले जब Hurun India Rich List 2020 ने धनिकों की लिस्ट जाहीर की थी। उसमें उन्होंने बालाजी वेफ़र्स के तीनों मालिकों का भी समावेश किया था। जिसमें चंदुभाई विराणी और कानजीभाई विराणी 2800 करोड़ और भिखाभाई विराणी 3300 करोड़ के मालिक है। 

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