जानिए मराठाओं की कुलदेवी सप्तशृंगी माताजी की महिमा इस चैत्र नवरात्रि में

शनिवार से चैत्री नवरात्री प्रारंभ

शनिवार से हिन्दू धर्म का खास पर्व चैत्री नवरात्री शुरू हो गई है। इस समय का हिन्दू धर्म में बहुत खास महत्त्व है। इस समय माताजी के मंदिरों में जबरजस्त भीड़ रहती है। सलाबतपुरा में राजराजेश्वरी श्री सप्तश्रृंगी माताजी के मंदिर में भी चैत्री नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्री नवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां बधा, बाबरी, गोत्रेज माता की पूजा करने आते हैं। नवरात्रि के दिन सलाबतपुरा रेशमवाड़ स्थित सप्तश्रृंगी देवी के मंदिर में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।  खासकर नवरात्रि के चौदहवें दिन सूरत के कई हिस्सों से हजारों की संख्या में लोग हमारी दादी नर्मदा माता का झंडा फहराने के लिए पैदल आते हैं।  रात के बारह बजे माताजी की मूर्ति को उनके सिर पर फहराया जाता है और पूनम के दिन नवरात्रि पूरी होती है।  
इस बारे में पुजारी बंशीलाल महाराज जादव ने कहा कि मंदिर का निर्माण वर्ष 1970 में किया गया था। हमारी दादी नर्मदा माता ने यहां एक मंदिर बनवाया और महाराष्ट्र नासिक के पहाड़ पर स्थित शक्तिपीठ माताजी को यहां लाने का फैसला किया और वहां से चांदी की पादुका पालकी लाकर यहां स्थापित की थी।  वर्तमान मंदिर 1997 में केवल 11 महीनों में बनाया गया था और माताजी की मूर्ति जयपुर मकराना पत्थर से बनाई गई थी।, जो शक्तिपीठ सप्तश्रृंगी माता की मूर्ति के समान है।

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