इस देश में महंगाई की ऐसी पड़ी है मार कि बैंकों को किसी को भी लोन ना देने का आदेश

भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहा ये देश

ज़िम्बाब्वे की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। एक समय में 750 प्रतिशत मुद्रास्फीति झेल रहा इस देश वर्तमान में मुद्रास्फीति अभी भी बहुत अधिक है। यहां मार्च में महंगाई दर 96.4 फीसदी थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि स्थानीय केंद्रीय बैंक द्वारा पीड़ित लोगों को राहत देने के नाम पर लिया गया फैसला अर्थव्यवस्था को और प्रभावित करेगा और लोगों पर और बोझ डालेगा।
आपको बता दें कि ज़िम्बाब्वे के रिज़र्व बैंक ने किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा किसी भी सरकारी या निजी व्यवसाय या व्यक्ति को ऋण देना तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है।  इसके अलावा बैंकों को अब से कर्ज नहीं देना होगा। साथ ही अभी जिनके लिए ऋण की घोषणा की गई है, उसके लिए केस-आधारित निर्णय लिया जाएगा।
बता दें कि 7 मई को राष्ट्रपति ई डी मंगग्वा ने घोषणा की कि देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और स्थानीय लोगों का विश्वास अर्जित करने के लिए विभिन्न आर्थिक उपाय किए जाएंगे। इसी क्रम में यह घोषणा की गई है। ऐसे में अब सवाल यह है कि अर्थव्यवस्था कैसे काम करेगी? अगर यह कदम देश को व्यापार के लिए ओवरड्राफ्ट, नए निवेश के लिए सावधि ऋण या खरीद के लिए व्यक्तिगत ऋण प्राप्त करने से रोकता है।
यह कदम तभी उठाया जाता है जब इस बात के सबूत हों कि बैंक पैसा छाप रहे हैं, यह छपा हुआ पैसा वही खरीद रहा है और खरीद के कारण महंगाई बढ़ रही है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले का क्या असर होगा, यह तो वक्त ही बताएगा कि महंगाई गिरेगी या अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आएगी।

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