पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल तो बजा, लेकिन झंडे-बैनरों का बाजार नहीं सजा

चुनावी प्रचार का तरीका बदलने से सूरत के झंडे बेनर खेस व साड़ी निर्माताओं में निराशा

उत्तरप्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर विधानसभाओं के चुनाव आगामी 10 फरवरी को प्रारम्भ होने जा रहे हैं व परिणाम 10 मार्च को आ जाएंगे, इस बार के चुनाव जमीन पर कम व हवा में ज्यादा लड़े जाएंगे। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार इस बार राजनैतिक पार्टियां रोड़ शो, रैलियां व नुक्कड़ सभाएं नही कर पाएगी। इस बार के चुनाव प्रचार का माध्यम सोश्यल मीडिया, इलोक्ट्रॉनिक्स मीडिया व प्रिंट मीडिया चुनाव आयोग के नियमानुसार तयशुद्धा खर्च में चुनाव सम्पन्न करना है तो ऐसे में वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, ट्विटर जैसे सोश्यल मीडिया के माध्यम प्रभावी साबित होंगे।
बेनर, झंडे, साड़ियां, टोपी, खेस आदि प्रचार सामग्री अप्रभावी :
प्रत्येक चुनाव में मतदाताओं को अपनी और आकर्षित करने हेतु रैलियों, रोड़ शो व नुक्कड़ सभाओं में मतदाताओं को गले मे डालने हेतु खेस (मफलर) टोपियां, (केप) टीशर्ट, कुर्ते, पगड़ी, महिलाओं को साड़ियां, माथे की बिंदियां, मंगलसूत्र, व हर किसी के लिए बिल्ले (बेज), हेंडबेड, सिरपट्टी, चाबी के छल्ले, कारों-स्कूटर व मोबाइल के स्टिकर, छाते आदि बांटे जाते है, लेकिन इस बार ये तमाम चुनाव सामग्री निरर्थक साबित होगी व राजनैतिक पार्टियों की और से इन चुनाव प्रचार सामग्रियों में मांग सर्वथा नदारद है। 

सूरत से भी भेजे जाते है, बेनर, झंडे, साड़ियां व सिरपट्टी आदि :
चुनाव प्रचार सामग्री में अहमदाबाद, मथुरा, हैदराबाद व लखनऊ आदि शहरों के अलावा सूरत भी एक केंद्र बन कर उभरा है, झंडे बेनर व सिर की पट्टियां के उत्पादक गाडिया ब्रदर्स के श्री अरविंद गाडिया के अनुसार चुनाव प्रचार सामग्री के उत्पादक केंद्रों की सूची में सूरत का नाम अवश्य जुड़ा हुआ है लेकिन सूरत में महज 10-20 प्रतिशत इन्क्वारी ही रहती है, हालांकि सूरत उत्पादित चुनाव प्रचार सामग्री फिनिश व क्वालिटी स्तर पर गुणवत्ता परक व बेहतरीन मानी जाती है लेकिन चुनाव प्रचार में क्वालिटी पसन्द लोग कम ही होते हैं, अतः सूरत उत्पादित चुनाव प्रचार सामग्री के भाव मथुरा, हैदराबाद व अहमदाबाद जैसे उत्पादकों के समक्ष अलबत्ता महंगे पड़ते हैं। श्री अरविंद गाडिया के अनुसार झंडे, बेनर व झालर लड़ी आदि में 80 प्रतिशत भिवंडी व मालेगांव उत्पादित रोटो कपड़ा खपता है व 20 प्रतिशत में चमकदार साटिन कपडे की मांग रहती है, श्री गाड़िया के अनुसार रोटो ग्रे कपड़ा 8 रु से 11 रु प्रति मीटर तक की रेंज का व साटिन ग्रे कपड़ा 14 से 16 रु प्रति मीटर की दर का होता है, रोटो डाइंग कराने का प्रोसेस चार्ज प्रति मीटर 3 से 6 रु व साटिन प्रोसेस चार्ज प्रति मीटर 5 से 8 रु व प्रिटिंग चार्ज 5 से 10 रु है। मथुरा, अहमदाबाद, हैदराबाद व बालोतरा आदि शहरों में जॉब दरें सूरत के मुकाबले 20 प्रतिशत तक कम रहती हैं। गले के दुप्पटे, खेस व मफलर के लिए सूरत विशेष रूप से जाना जाता है, सूरत उत्पादित खेस की फिनिशिंग व इसका क्रिएशन बेजोड़ होती है, हालांकि महावीर इंटरनेशनल, लायन्स क्लब आदि सामाजिक, धार्मिक संगठन, विभिन्न जातिगत संगठनो  तथा मंदिरों व तीर्थों पर सूरत उत्पादित गले के खेस भेजे जाते हैं, लेकिन राजनैतिक पार्टियों के उपयोग में आने वाले खेस, झंडिया, झालर, झंडे, बेनर व लंबे बेनर आदि सामग्री कम दरों के कारण मथुरा, हैदराबाद, बालोतरा, अहमदाबाद आदि मंडियों से तैयार करा कर भेजे जाते है जो कि सूरत के समक्ष 20 प्रतिशत तक कम भावों में उपलब्ध हो जाते हैं।
चुनावी चिन्ह व नेताओं के फोटो युक्त डिजिटल प्रिंट साड़ियों के लिए सूरत मुख्य ठिकाना :
2019 के चुनावों में सूरत से नरेंद्र मोदी के फोटो युक्त डिजिटल प्रिंट साड़ियां देश भर में बड़े पैमाने पर बिकी और इन वैरायटियों में सूरत एक मात्र उत्पादक शहर बन कर उभरा था,  मोदीजी के फोटो युक्त साड़ियां जब ज्यादा पसंद की जाने लगी व इलोक्ट्रॉनिक्स मीडिया के अनेक न्यूज चैनलों ने सूरत उत्पादित मोदी जी के फोटो युक्त साड़ियों पर न्यूज स्टोरियां चलाई तो कांग्रेस पार्टी की और से 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रियंका गांधी व राहुल गांधी के फोटो युक्त साड़ियाँ भी प्रिंट कराई लेकिन प्रिंट करानी व उसे पसन्द करनी दोनों अलग अलग बिंदु है,  2014 में मोदी जैकेट चली तो  2019 के लोकसभा चुनावों में मोदीजी के फोटो व कमल निशान वाली साड़ियों की धूम रही। यही नही जब 2021 में पश्चिम बंगाल के विधान सभा चुनाव हुए तो जहां मोदीजी के फोटो व कमल निशान वाली डिजिटल साड़ियां बिकी वहीं ममता बनर्जी के फोटो व तृणमूल कांग्रेस के तीन पत्तियों के निशान वाली साड़ियां भी पसन्द की गई। सूरत डिजिटल प्रिंट साड़ियों का हब माना जाता है, सूरत में सर्जिकल स्ट्राइक व विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान के फोटो युक्त डिजिटल साड़ियां भी प्रिंट हुई थी व पसन्द की गई थी। 2014 के चुनावों में तो सूरत के टेक्सटाइल्स मार्केटों में साड़ियों के डिब्बो,  पार्सलों पर लगने वाली प्लास्टिक पट्टियों, तथा इनवॉइस तक पर मोदीजी के नाम का प्रचार किया गया था। हालांकि इस बार चुनाव प्रचार सोश्यल मीडिया पर ही होना है अन्यथा इस बार मोदीजी व योगीजी के फोटो तथा कमल निशान युक्त तथा समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के फोटो युक्त व साइकिल निशान तथा राहुल-प्रियंका गांधी के फोटो युक्त साड़ियां अवश्य बिकती
श्री अशोक मेहता, सूची इंडस्ट्रीज

दिल्ली का सदर बाजार है चुनाव प्रचार सामग्री का बड़ा बिक्री केंद्र :
वैसे तो हर राज्य के कुछ शहरों में चुनावी प्रचार सामग्री के बिक्री केंद्र होते ही है लेकिन दिल्ली का सदर बाजार भारत का सबसे बड़ा चुनाव सामग्री विक्रय केंद्र है यहां चुनाव प्रचार से जुड़ी तमाम तरह की सामग्री उपलब्ध होती है, वहां के व्यापारी कई दशकों से इस कारोबार में जुटे हुए हैं, वैसे चुनाव सामग्री के व्यापार में रिस्क भी बहुत है कारण चुनाव बीत जाने के पश्चात उस सामग्री को वर्षोंवर्ष गोडाउनो में रखना पड़ता है और अगले चुनाव में पता नही कि वो सामग्री बिकेगी कि भी नही, दूसरा राजनैतिक पार्टियों के नेताओं के कहने पर माल तो तैयार करा दिया जाता है लेकिन वो उत्पाद ले जाएंगे कि नही, अगर लेने भेज भी दिया तो उसके पेमेंट को बकाया रखना रिस्क भरा ही सौदा होता है, ऊपर से तुर्रा यह कि पार्टी या नेता को चुनाव परिणामों में हार का सामना करना पड़ जाये तो बकाया पैमेंट वसूल करने हेतु जूते ही घिसने पड़ते है। अतः यह सौदा रिस्क भरा है। 
श्री भरत गाड़िया, गाड़िया ब्रोदर्स

पार्टी चुनाव चिन्ह युक्त मास्क की बिक्री रहेगी भरपूर :
चूंकि कोरोना व ओमिक्रोंन की महामारी के बीच चुनाव आयोग को इलेक्शन कराने पर मजबूर होना पड़ा, तथा इस बार चुनाव प्रचार मैदान में कम व सोश्यल मीडिया पर ज्यादा होगा। अतः चुनाव प्रचार सामग्री की इस बार अहमियत कम हो जाएगी, लेकिन कोरोना के खतरे के बीच मास्क राजनैतिक पार्टियों के प्रचारप्रसार का सशक्त माध्यम बन सकता है व ये सस्ता माध्यम भी है, नॉन वूवन के सर्जिकल मास्क 1 से 1,50 रु प्रति नग में बाजार मे उपलब्ध है माना जा रहा है कि इस बार चुनाव प्रचार में मास्क अहम भूमिका निभाएगा। सूचि इंडस्ट्रीज ग्रुप के अशोक मेहता सूरत में बड़े मास्क उत्पादकों में से एक है वे अतीत में तमिलनाडु में एक राजनैतिक पार्टी के चुनाव चिन्ह के एन-95 किस्म के 25 लाख मास्क आपूर्ति कर चुके है,  उनके यहां गुणवत्ता परक सर्जिकल मास्क जिसमें मेल्टबोन मटेरियल्स का उपयोग हुआ है जो जीवाणु रौकने में सार्थक है उसकी दर 1,40 से 1,50 रु व एन-95 5 से 6,50 प्रति मास्क है व चुनाव चिन्ह व पार्टी विशेष के रंग अनुसार एन-95 मास्क लगभग 7 रु तक उपलब्ध है, श्री अशोक मेहता के पास उत्तरप्रदेश से भाजपा व  समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले मास्क बनाने हेतु पूछपरख तो हुई है लेकिन ऑर्डर अभी मिला नही है। वे प्रतिदिन लाखो  की तादाद में मास्क आपूर्ति करने की क्षमता रखते हैं। ये उल्लेखनीय है कि 2020 में हुए गत बार के बिहार विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की और से कमल व मोदीजी के निशान वाले तथा तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनता दल ने व जनता दल यू जेडीयू आदि पार्टियों ने लाखों की तादाद में मास्क वितरित कर जहां वोटरों को लुभाने का प्रयास किया था वहीं प्रचारप्रसार का सशक्त माध्यम ढूंढा था। मास्क तो केरला के निकाय चुनावों में व मध्यप्रदेश के भी निकाय चुनावों में मास्क प्रचार का सटीक माध्यम बनाया था। मास्क आपूर्ति में सूरत के मास्क उत्पादक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
- गणपत भंसाली

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