गुजरात: बोर्ड की परीक्षा में मिले मास प्रमोशन से असंतुष्ट हैं कुछ छात्र

(Photo : IANS)

साल भर की कड़ी मेहनत के बाद इस तरह के परिणाम से खुश नहीं हैं कुछ छात्र और अभिभावक

कोरोना वायरस के कारण स्कूलों के बंद रहने और सुचार रूप से पढ़ाई ना होने पाने के कारण इस साल कक्षा 10 और 12 के छात्रों के सामूहिक प्रमोशन दे दिया गया। एक तरफ जहाँ अधिकांश बच्चों और अभिभावकों ने इसे स्वीकार लिया पर होशियार छात्रों को इन परिणामों से अन्याय का अहसास होने लगा है। कुछ छात्रों का कहना है कि अगर उन्होंने परीक्षा दी होती तो उनका परिणाम कुछ और होता।
ऐसे बहुत से छात्र हैं जो अपने परिणाम से बिल्कुल भी खुश नहीं है। सालभर तनतोड़ मेहनत करने के बाद इस तरह मास प्रमोशन से निराश छात्रों में जुड़वां बहनें क्रिना और कृष्णा का भी नाम आता है। कृष्ण को एक ग्रेड और कृष्ण को दो ग्रेड मिले। 80 फीसदी से ज्यादा अंक लाने वाली ये बहनें अपने रिजल्ट से संतुष्ट नहीं हैं। उनका परिणाम उनकी अपेक्षा से कम है।
आपको बता दें कि डॉक्टर बनने की चाहत रखने वाली दोनों बहनों के माता-पिता का भी कहना है कि अगर कम से कम 50 अंकों का पेपर लिया होता तो मेधावी छात्रों के साथ कोई अन्याय नहीं होता। गौरतलब है कि कक्षा -10 के सभी 8 लाख 57 हजार 204 छात्र कोरोना के कारण सभी सामूहिक पदोन्नति के साथ उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं 17,186 छात्रों को इसमें ए ग्रेड मिला है। इससे विज्ञान में जाने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी। छात्रों का मानना है कि यदि परीक्षा ली गई होती, तो केवल वे ही जिन्होंने कड़ी मेहनत की थी वे उच्च ग्रेड के साथ उत्तीर्ण होते और छात्रों को किसी भी अन्याय का डर नहीं होता। लेकिन कई छात्र मास प्रमोशन के कारण परेशान हैं। और असंतोष और अन्याय की भावनाओं का अनुभव कर रहे है।

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