गुजरात : डॉक्टरों ने रेमड़ेसिविर को खुले बाजार में रखने की माग की

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कालाबाजारी रोकने और नकली इंजेक्शन की प्रवृतियों को रोकने के लिए दिया सुझाव

राज्य में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है। हर तरफ कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों को बेड की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा जो मरीज अस्पताल में भर्ती है, उन्हें भी इलाज के लिए जरूरी रेमड़ेसिविर इंजेकशन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। मरीज के परिजन इंजेक्शन लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों में मेडिकल के बाहर खड़े रहते है। इसके अलावा कई लोगों द्वारा इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे होने की बात भी सामने आई है। तो कई लोग नकली इंजेक्शन भी बाज़ारों में बेच रहे है। ऐसे में डोकटरों ने इंजेक्शन पर का सरकारी नियंत्रण हटाकर उसे खुले बाज़ारों में बेचने की मांग की है।
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)

राज्य में रेमडेसीविर इंजेक्शन फिलहाल सरकार द्वारा जिला कलेक्टर, महानगरपालिका के कमिश्नर और सरकारी अधिकारियों की देखरेख में पहुंचाया जाता है। सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन का खपत पूर्ण होने के बाद निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे मरीजों को इंजेक्शन दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को इंजेक्शन लेने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए मरीजों की तकलीफों को दूर करने के लिए सीनियर फिजीशियन और अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभ्य वसंत पटेल रेमडेसीविर इंजेक्शन पर सरकार का नियंत्रण दूर कर उसे खुले बाजार में बेचने की मांग कर रहे हैं। 
डॉ वसंत पटेल का कहना है कि इंजेक्शन को बाजार में रखने से उसकी कालाबाजारी और नकली इंजेक्शन बनाने की प्रवृत्तियों पर अंकुश आ सकेगा। सरकार ने फिलहाल जो नियंत्रण अपने पास रखा है उसे दूर कर देना चाहिए और कोविड डेजीग्नेटेड अस्पतालों में इलाज करवा रहे और होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए इंजेक्शन लेना और भी आसान करवाना चाहिए। 

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