संक्रमित मामलों में कमी पर लापरवाही ना दिखाए सरकार, शुरू करें तीसरी लहर की तैयारी

(Photo: gujarathighcourt.nic.in)

राज्य भर में म्यूकोरिया के इंजेक्शनों की कमी, सरकार की बनाई नीति निश्चित और स्पष्ट नहीं

गुजरात में कोरोना की दूसरी लहर पर सुओमोटो के आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि कोरोना के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन सरकार को कमी को लेकर आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए और तीसरी लहर पर अंकुश लगाने के प्रयास करने चाहिए। आज अपलोड किए गए आदेश में न्यायमूर्ति बेलाबाहेन त्रिवेदी और न्यायमूर्ति भार्गव डी करिया की पीठ ने कहा कि म्यूकोरिया के इलाज के लिए इंजेक्शन की राज्यव्यापी कमी है और इसके वितरण के लिए सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसके वितरण को प्रभावी बनाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य भर में कोविड के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसलिए उम्मीद की एक किरण जगी है और स्थिति में सुधार होता दिख रहा है। हालांकि, कोरोना की लहरों और उसके उतार-चढ़ाव के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। कोर्ट का मानना है कि सरकार को आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए और कोरोना मामलों के संक्रमण के प्रभाव और इसके प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर के लिए सर्वोत्तम प्रयास करने चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी तीसरी लहर की आशंका जताई है। साथ ही सरकार को अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं स्थापित करनी चाहिए। न केवल एक नया स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए बल्कि आवश्यक मशीनों और प्रशिक्षित कर्मचारियों को भी वहां नियुक्त किया जाना चाहिए।
म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की वितरण नीति के संबंध में उच्च न्यायालय ने कहा था कि राज्य भर में इन इंजेक्शनों की कमी है और इसके वितरण के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति निश्चित और स्पष्ट नहीं लगती है। इसलिए प्रत्येक जिले में विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही किस अस्पताल में कितने इंजेक्शन का प्रयोग किया गया है, इसका डाटा भी स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाए।

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