सूरत की डाईंग मिलों को बिजली और गेस बिल में राहत देने की मांग

साऊथ गुजरात टेक्सटाईल प्रोसेसर्स एसोसिएशन (एसजीटीपीए) की फाईल तस्वीर

सूरत में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए राज्य सरकार ने विशेष नियंत्रण लगाने से टेक्सटाईल मार्केट बंद है , डाईंग मिलों को आर्थिक संकट से उभारने के लिए बिजली और गैस कंपनी से प्रोसेसर्स एसोसिएशन द्वारा राहत की मांग की गई।

सूरत की डाईंग मिलों को बिजली और गेस बिल में राहत देने की मांग
एसजीटीपीए के सीईओ ने डीजीवीसीएल और गुजरात गेस कंपनो को दिया ज्ञापन 
सूरत में वर्तमान कोरोनाकाल के दौरान ज्यादार डाईल मिले बंद होने से साऊध गुजरात टेक्सटाईल प्रोसेसर्स एसोसिएशन (एसजीटीपीए) के सीईओ सुनिल शाह ने दक्षिण गुजरात बिजली कंपनी लिमिटेड (डीजीवीसीएल) और गुजरात गैस कंपनी को ज्ञापन देकर बिजली बिल तथा गेस बिल में राहत देने के साथ विलंबित चार्ज, पैनल्टी ब्याज नही वसूलने की मांग रखी है। 
कोरोना संक्रमण की दुसरी लहर के दौरान सूरत के टेक्सटाईल क्लस्टर के डाईंग प्रोसेसिंग युनिटों के लिए घातक साबित हुई। एक ओर 70 प्रतिशत श्रमिकों का पलायन से मिलों में जैसे तैसे एक पाली में काम चल रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेग्लुरू, कोलकत्ता, चेन्नई और राजस्थान की मार्केट लॉकडाउन की वजह से बंद है। ऐसी परिस्थिति के दौरान सूरत की डाईंग युनिटों में प्रोडक्शन बहुत कम हो गया है। सूरत की टेक्सटाईल मार्केट भी दो सप्ताह के लिए बंद होने से टेक्सटाईल प्रोसेसर्स को जोबवर्क मिलना बंद हो गया और जो मिल जोबवर्क पर निर्भर है उन्हे ताला लगना की नौबत आयी है। ऐसी परिस्थिति के दौरान मिलों मे कर्मचारीओं को पगार खर्ची देनेकी समस्या खडी हुई है।
साऊध गुजरात प्रोसेसर्स एसोसिएशन के सीईओ सुनिल शाह ने डीजीवीसीएल के एमडी योगेश चौधरी और गुजरात गेस के एमडी एवं जनरल मेनेजर को पत्र लिखकर प्रोसेसिंग युनिटों को बिजली बिल तथा गेस बिल में राहत देने की मांग की है।
एसजीटीपीए के अध्यक्ष जितेन्द्र वखारीया ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना की दुसरी लहर में कपडा व्यापार पर बुरा असर पडा है। कपडे का व्यापारी जिन राज्यों और शहरों मे है वहा पर लोकडाउन लागु है। ऐसी परिस्तिति में सूरत की 50 प्रतिशत से अधिक मिले बंद है तो कुछ मिलों में मात्र एक पाली में काम चालु है। ऐसी परिस्थिति के दौरान डीजीवीसीएल बिजली बिल के विलंबित चार्ज की पैनल्टी और ब्याज नही वसूलना चाहिए तथा जिन मिलों ने कमिटमेन्ट चार्ज का कोन्ट्राक्ट किया है और वह मिल वर्तमान में बंद है तो उनके पास से मात्र मिनिमम चार्ज लेकर उन्हे राहत देनी चाहिए। जितेन्द्र वखारीया ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि पिछले साल सरकार ने बिजली बिल भरने में राहत दी थी और पुराने बकाया बिल के ब्याज में 50 प्रतिशत तक राहत के साथ विलंबित बिल की पैनल्टी भी माफ की थी। जिसके कारण पिछले साल डाईग उधोग कोरोनाकाल के बाद जल्द पुर्ववत हुआ था। एसजीटीपीए जल्द ही इस मामले की रजुआत उर्जामंत्री सौरभभआई पटेल से करेंगे। 

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