दाहोद : इंसानों के बाद अब बकरियों को करना पड़ रहा है क्वारंटाइन, जानिए पूरा मामला

प्रतीकात्मक छवि

दाहोद में जानवरों में पीपीआर नामक वायरस का पहला मामला आया सामने

एक तरफ जहाँ देश और दुनिया अभी तक कोरोना से निजात नहीं पा सका, जहाँ आये दिन कोरोना के नए नए प्रकार सामने आ रहे है वहीं अब राज्य से एक परेशान कर देने वाली जानकरी सामने आई है। दाहोद तालुका के एक गांव में जानवरों में एक दुर्लभ वायरस की सूचना मिली है। दरअसल दाहोद में जानवरों में पीपीआर नामक वायरस का पहला मामला पाया गया है।  जिसमें एक चरवाहे की एक बकरी की अचानक मौत हो गई और उसके नमूने भोपाल की एक प्रयोगशाला में भेजे गए। जहां उनकी रिपोर्ट में पीपीआर वायरस होने का जिक्र किया गया।
पीपीआर द्वारा बताई गई मृत बकरियों के संपर्क में आने वाली अन्य 24 बकरियों को क्वारंटाइन कर दिया गया है। ताकि यह दूसरों के संपर्क में न आए और संक्रमण न फैले। हालांकि, सभी बकरियों को भी इस बीमारी से बचाने के लिए टीका लगाया जाएगा। हालांकि, यह रोग अन्य प्रजनकों में फैल गया है। लेकिन दूसरी राहत की खबर यह है कि यह बीमारी बकरियों से इंसानों में नहीं फैलती है।
आपको बता दें कि पेस्ट डेस पेटिट्स रुमिनेंट्स या पीपीआर भेड़ और बकरी प्लेग के रूप में भी जाना जाता है। यह एक अत्यधिक संक्रामक पशु रोग है जो घरेलू और जंगली छोटे जुगाली करने वाले जानवरों को प्रभावित करता है। यह जीनस मोरबिलीवायरस, परिवार पैरामिक्सोविरिडे से संबंधित वायरस के कारण होता है। एक बार किसी को भी ये हो जाने के बाद वायरस जानवर को  मार भी सकता है। पीपीआर को पहली बार 1942 में पश्चिम अफ्रीका के कोटे डी आइवर  में देखा गया था। तब से यह रोग अफ्रीका, मध्य पूर्व, एशिया और यूरोप के बड़े क्षेत्रों में फैल गया है। आज, 70 से अधिक देश इससे प्रभावित हैं या उच्च जोखिम में हैं।

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