कोरोना काल के दौरान इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले दो डॉक्टरों को कोर्ट ने दी यह सजा

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)

अन्य चार आरोपियों की जमानत की गई नामंज़ूर

सूरत में कोरोना पेशेंट के लिए जरूरी ऐसे रेमड़ेसिविर इंजेक्शन के कालाबाजारी करने के कौभांड में दो डॉक्टर तथा अन्य चार आरोपियों को लाल गेट पुलिस ने हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट ने कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए दोनों आरोपी डॉक्टरों को 15 दिन की सिविल अस्पताल में कोरोना के मरीजों की सेवा करने की शर्त के साथ जमानत दी थी। इसके अलावा अन्य आरोपियों की जमानत रद्द कर उन्हें जेल भेजने का हुक्म दिया। 
बता दें कि लाल गेट पुलिस ने रेमड़ेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के केस में भावनगर के रहने वाले जेनिशकुमार पोपट काकड़िया, भद्रेश नाकरानी, जैमिष ठाकरसी जिकादरा और अमरेली जिले के रहने वाले डॉक्टर साहिल विनु घोघारी, डॉक्टर हितेश डाबी तथा भाविन नाम के एक और व्यक्ति को हिरासत में लिया था। इस दौरान दोनों डॉक्टर सहित अन्य चार के पास से पुलिस ने इंजेक्शन के तीन बॉक्स और मोबाइल तथा कैश मिलाकर कुल 1.23 लाख का मुद्दा माल जप्त किया था। सभी आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस द्वारा उनके रिमांड मांगे गए थे। जिसके पूर्ण होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान दोनों डॉक्टर सहित सभी आरोपियों ने अपनी जमानत की मांग की थी।  
इस केस कि सुनवाई के दौरान एडिशनल चीफ जुडिशल मैजिस्ट्रेट अग्रवाल ने फिलहाल की कोरोना महामारी के दौरान डॉक्टरों की कमी होने की बात को ध्यान में रखते हुए दोनों आरोपी डॉक्टरों को 15000 दंड तथा सिविल अस्पताल में 15 दिन कोरोना मरीजों की सेवा करने की शर्त के साथ जमानत दे दी। इसके अलावा कोर्ट ने सिविल हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल ऑफिसर से भी दोनों डॉक्टर के वर्तन का रिपोर्ट कर कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि अन्य आरोपियों की जमानत को कोर्ट द्वारा रद्द कर उन्हें जेल भेजा गया है

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