अद्भुत : इस भारतीय गणितज्ञ ने हल किया 161 साल पुरानी गणित का एक नियम

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श्रीनिधि इंस्टीइट्यूट ऑफ साइंस और टेक्नोलॉजी में बतौर गणितज्ञ काम करते रीमन हाइपोथिसिस को हल करने वाले कुमार ईश्वरन

अगर आपको गणित की सामान्य जानकारी हो तो आपको पता होगा कि गणित के ऐसे कई नियम है जो बहुत ही जटिल और अबूझ है। ऐसा ही एक नियम है रीमन हाइपोथिसिस (Riemann hypothesis), जो बीते 161 सालों से अनसुलझी, अबूझ थी लेकिन अब हैदराबाद के रहने वाले गणितज्ञ कुमार ईश्वरन ने दावा किया है कि उन्होंने 161 साल पुरानी गणित की इस अबूझ पहेली को सुलझा लिया है।
जानकारी के अनुसार अमेरिका के क्लेस मैथमैटिक्स  इंस्टीट्यूट ऑफ कैंब्रिज की ओर से घोषित किए गए मिलिनियम प्राइज प्रॉब्लसम में रीमन हाइपोथिसिस भी शामिल है। इंस्टीटट्यूट की ओर से इसे हल करने वाले को दस लाख डॉलर इनाम देने की भी घोषणा की गई है। ईश्वनरन का कहना है कि उन्होंने इस हाइपोथिसिस का प्रूफ खोज लिया है।
कुमार ईश्वमरन का कहना है कि उन्होंने करीब 5 साल पहले ही इस हाइपोथिसिस के हल को इंटरनेट पर अपलोड कर दिया था। वह श्रीनिधि इंस्टीइट्यूट ऑफ साइंस और टेक्नोलॉजी में बतौर गणितज्ञ काम करते हैं। हैदराबाद के गणितज्ञ कुमार ईश्वरन के अनुसार जानकारी कि उन्होंने 2016 में इस हाइपोथिसिस का प्रूफ समीक्षा के लिए इंटरनेट पर अपलोड किया था। 2018-19 में उन्होंने प्रूफ पर कई लेक्चर्स भी दिए थे। उनका यह भी दावा है कि उनके हाइपोथिसिस के प्रूफ को हजारों बार डाउनलोड किया गया था। 2020 में आठ गणितज्ञों की एक्सपर्ट कमेटी गठित की गई थी, जिन्होंने उनके काम की समीक्षा की थी
आपको बता दें कि 1 से लेकर 20 के बीच की प्राइम नंबर्स( वो संख्या जो किसी भी संख्या से विभाजित ना होती हो) की संख्या को आसानी से गिना जा सकता है लेकिन एक मिलियन (दस लाख) से 10 बिलियन (दस अरब) के बीच प्राइम नंबर्स की संख्या की गणना कठिन काम है। इस हाइपोथिसिस से प्राइम नंबर की सटीक गणना संभव है।

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