विश्व कविता दिवस पर विशेष : 87 वर्ष की अवस्था में सूरत के श्री परसराम तोदी "पारस" को कविता सुनाने व कवि सम्मेलनों के प्रति गजब की दीवानगी

विश्व कविता दिवस पर विशेष : 87 वर्ष की अवस्था में सूरत के श्री परसराम तोदी

उम्र 87 वर्ष और कविता व कवि सम्मेलनों के प्रति इतना गहरा लगाव व आकर्षक कि जहां कहीं भी किसी आयोजन की इनको खबर लग जाती है तो वे किसी भी स्थिति में वहां पहुंच ही जायेंगे। राजस्थान के सीकर जिले के अंतर्गत गरोडा कस्बे के निवासी व चलखिया जिला हावड़ा (बंगाल) के प्रवासी श्री परसराम तोदी "पारस" के रग-रग व जर्रे-जर्रे में कविताएं व काव्यप्रेम समाया हुआ हैं। कविता के प्रति अनुराग युवावस्था से ही हैं। उन्हें कविता की पंक्तियां गुनगुनाते देख अपने विद्यार्थी जीवन मे कभी-कभी इनके अध्यापक कह देते थे कि 'पारस कविता सुनाओ'। चलखिया जो कि कोलकाता से सटा हुआ हैं अतः श्री तोदी वहां आयोजित प्रत्येक कवि सम्मेलन में पहुंच ही जाते थे, और जब तक कवि सम्मेलन चलता रहता था तब तक वे वहां से हटते नही थे,तथा उस आयोजन में कविताओं का रसास्वादन करके ही घर लौटते थे।
चलखिया साहित्य परिषद में हर रविवार को आयोजित काव्य गोष्ठी में सम्मिलित होते रहते हैं और अपनी व दूसरे कवियों की रचनाएं वहां मौजूद श्रोताओं को सुना कर ही घर लौटते रहे है। कवि सम्मेलनों के प्रति इतना आकर्षक कि कोलकाता व आस-पास में आयोजित तमाम कवि सम्मेलन में न बल्कि कविता सुनते अपितु दर्शक दीर्घा में खड़े होकर भी वे कविताओं की एक-दो पंक्तियां सुना कर ही संतोष करते थे। श्रोता तो श्रोता, वे कवियों तक को भी कविताएं सुनाने से नहीं हिचकिचाते, देश के मशहूर ओजस्वी कवि श्री हरिओम पंवार तक को उनके मेरठ सिविल लाइंस स्थित निवास पर जाकर कविताएं सुना कर आए हैं, मैंने पूछा कि मेरठ क्यों गए थे ? तो वो बोले मेरठ में मेरा ससुराल हैं, एक साला वहां निवास करता हैं। ये उल्लेखनीय हैं कि वरिष्ठ कवि डॉ हरिओम पंवार तो कई बार तोदी जी के नामोल्लेख के साथ उनकी वे पंक्तियां मंचो पर यदा-कदा सुना ही देते हैं, जिसमें लालू यादव का ड्राइवर लालू से पूछता है कि सर गाड़ी बाई-पास होकर ले लूं तो लालू काव्यमय इस तरह जवाब देते हैं...
"संजय मरा आकाश में
राजीव मरा मद्रास में
इंदिरा मरी घर के पास में
तुम मुझे ले जाकर मारोगे बाई-पास में"
मैंने तोदीजी को पूछा कि क्या वाकई "बाईपास" वाली पंक्तियां आप की रची हुई है ? तो तोदी जी बोले अगर मेरी नही होती तो अब तक इसका वारिश आ ही जाता, उन्होंने आगे बताया कि मैंने अन्य ओर भी कई कविताएं लिखी हैं। में 'हास्य रस' व 'घोटाला रस' में भी कविताएं लिखता हूँ। 'घोटाला रस' में औऱ कोई कवि नही लिखता।
तोदी जी ने काव्य प्रस्तुति हेतु बतौर पारिश्रमिक तो कभी कभार ही 500-1000 रु प्राप्त किए होंगे, अधिकतया वे बिना किसी पारिश्रमिक व बिना किसी अपेक्षा के साथ अपनी व अन्य कवियों की रचनाएं सुनाते हैं। कविता सुनाना व सुनना उनके लिए किसी नशे से कम नही हैं। सूरत में होली के अवसर पर हमारे स्मित लॉफिंग कल्ब द्वारा पिछले कई वर्षों से हास्योत्सव कार्यक्रम में अमूमन तोदी जी की उपस्थिति रहती आई हैं। वर्ष 2020 व 2021 में कोरोना महामारी के चलते आयोजन स्थगित रहने से व वर्ष 2022 में तोदी जी की शारीरिक अस्वस्थता के चलते स्मित लाफिंग क्लब के होली हास्य कवि सम्मेलन में श्रोता तोदी जी की रचनाओं से महरुम रहे हैं।
हालांकि अन्य कई मौकों पर तोदीजी को काव्यपाठ हेतु आमन्त्रित करने का अवसर अतीत में मिलता रहा हैं। गत 13 मार्च 2022 को हरि सत्संग समिति सूरत द्वारा वीर नर्मद यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में मेरी संयोजना में हरिओम पंवार, सुरेन्द्र शर्मा, कविता तिवारी, शशिकांत यादव, सूदीप भोला व गौरव शर्मा आदि कवियों की प्रस्तुति थी तो तोदी जी शारीरिक रुग्णता के बावजूद कन्वेंशन हॉल पहुंच गए व हॉल के प्रवेश द्वार के निकट उस जगह पर बैठे दिखे जहां से कवियों को हॉल में पहुंचना था। तीन वर्ष पूर्व तोदी जी ने मुझे बताया था कि वे दो-तीन दशक पूर्व हावड़ा में किसी व्यवसाहिक संगठन के लिए एक आयोजन भी कर चुके हैं, जिसमें डॉ हरिओम पंवार, शैलेश लोढ़ा, अरुण जैमिनी, प्रवीण शुक्ल, सुमन दुबे डॉ कीर्ति काले को भी आमन्त्रित कर चुके हैं। डॉ कीर्ति काले व डॉ सुमन दुबे तोदीजी की पसंदीदा कवयित्रियाँ हैं, जिनकी रचनाएं इनको बहुत पसंद हैं।
तोदी जी की कोलकाता से प्रकाशित "सन्मार्ग" अख़बार में कविताएं तथा विभिन्न राजनैतिक सामाजिक विषय आधारित टिप्पणियां अमूमन छपती रहती हैं, व जब-जब भी वे हावड़ा रहते हैं तब भी प्रकाशनार्थ भेज ही देते हैं। उनका बारहों मास 365 दिन एक ही पहनावा है, वो है सफेद धोती व सफेद-क्रीम रंग का कुर्ता। तोदी जी को यह पता लगना चाहिए कि वहां 20-30 लोग मौजूद है तो वे वहां पहुंच कर कविताएं सुनाना शुरू कर देते हैं। तीन वर्ष पूर्व होली के दिनों सुबह-सुबह मेरे आवासीय परिसर पहुंच गए, और वहां मुख्य गेट पर मौजूद वाचमैन से बोले कि भंसाली जी को फ़ोन लगाओ, फोन मिलाते ही तोदीजी मुझ से बोले कि आप मेरे साथ चलें, वहां 50 लोग एक साथ मिलेंगे, वहां मुझे कविताएं पढ़ने की अनुमति मिली हैं। में जब तक नीचें नही पहुंचा तब तक वहां मौजूद तीन-चार वाचमेनो तथा स्कूल बस का इंतजार कर रहे बच्चों व उनके अभिभावकों को कविताएं सुनाने बैठ गए। में नित्य की तरह विवेकानंद गार्डन जाने हेतु नीचे आया तो सुबह साढ़े सात बजे वे मुझे साथ लेकर वेसु स्थित एक हेल्थ क्लब "सेराजिम" पहुंचे, और वहां अपने स्वास्थ्य सुधार हेतु पहुंचे लोगों को सुनाने लग गए कविताएं। तोदी जी ने मुझे गाड़ी में बैठे-बैठे बताया कि मैंने मोदीजी पर एक नई रचना लिखी है तो मैने कहा सुनाइये,कैसी रचना हैं, तो उन्होंने ये पंक्तियां सुनाई.....
"प्रीत की रीत बता दे मोदी,
मानवता हमें सीखा दे मोदी
भाई बना भाई का दुश्मन
इनका द्वेष मिटा दे मोदी"
जब कविता सम्पन्न हुई तो मैंने कहा कि ये कविता तो आप वर्षो से सुनाते आ रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि पहले इस कविता में "पंछी" का जिक्र था अब जहां जहां "पंछी" था तो वहां-वहां "मोदी" कर दिया तो मैंने कहा कि ये कविता नई कैसे हो गई ? तो उनका प्रत्युत्तर गजब का था कि देश के सभी बड़े कवि भी तो यही कर रहे हैं, वे अपनी वर्षों पुरानी कविताओं में भी तो नया सन्दर्भ जोड़ कर ही तो सुना रहे हैं।
तीन वर्ष पूर्व 20 मार्च को स्मित लॉफिंग क्लब सूरत द्वारा विवेकानंद गार्डन में 'होली हास्य हंगामा' काययक्रम आयोजित था, तो अस्वस्थ चल रहे तोदी जी को अखबार में छपी खबर से पता चला तो एक दिन पहले अतार्थ 19 मार्च को ही फोन आ गया कि होली के कार्यक्रम में मुझे भी चलना है अतः आपके एपार्टमेंट में पहुंचता हूं, मुझे भी लेकर जाना , लेकिन वे किसी कारण नही पहुंच पाए, तोदी जी कवियों को ही नही बल्कि पूर्व विदेश मंत्री स्व : सुषमा स्वराज, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल स्व : कल्याणसिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मशहूर लाफ्टर कलाकार कपिल शर्मा तथा मशहूर पहलवान सुशीलकुमार तक को कविताएं सुना चुके हैं। पूर्व राज्यपाल स्व : कल्याणसिंह का तो बकायदा पत्रोत्तर भी आया था, जिसे तोदी जी ने संभाल रखा हैं।
जब तोदी जी ने जयपुर के किसी एक राजनैतिक रूप से आयोजित कार्यक्रम में वसुंधरा जी को कविता सुनाई तो वसुंधराजी तोदीजी से बोली कि आप इतनी देर कहां पर थे ? पहले आए होते तो कुछ कविताएं और सुनती। हालांकि अब तोदी जी की उम्र 87 वर्ष की हो जाने से उनके शरीर मे शिथिलता आ गई हैं, ओर चलने-फिरने व उठने-बैठने में अलबत्ता दिक्कत रहती है। लेकिन मनोबल की मजबूती व कविता के प्रति गहरे लगाव के चलते वे किसी भी स्थिति में भले ही बरसात क्यों न बरसती हो, बरसती बारिश में वे छाता लेकर भी कवि सम्मेलनों में पहुंच ही जाते हैं। दुर्भाग्यवश कभी किसी कवि सम्मेलन से वे वंचित रह जाते हैं तो उनकी पीड़ा व वेदना बढ़ जाती हैं।
तीन वर्ष पूर्व इसी माह में तोदी जी मेरे दो आयोजनों से वंचित रह गए, कारण उन्होंने फ्लेट थोड़ा दूरी पर ले लिया, वहां से ऑटो आसानी से मिलता नहीं, और रात्रि में उन्हें कवि सम्मेलन स्थल पहुंचाने वाले कोई थे नही, तो वे मन मसोस कर रह गए। हालांकि 13 मार्च के 2 आयोजनों के अलावा आगामी 26 मार्च व 9 अप्रैल को मेरी संयोजना में विभिन्न आयोजकों के 2 कवि सम्मेलन आयोजित होने जा रहे हैं, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति देख उन्हें सूचना देने का विचार नही है कारण इन विपरीत हालातों में भी वे कवि सम्मेलन में पहुंचे बिना रहेंगे नहीं। तोदी जी पिछले तीन वर्षों से सूरत में ही है, और जब जब भी इन्हें किसी आयोजन की खबर लगती तो मेरे पास इनका फोन आ ही जाता था कि आयोजन कहां है ? और कौन-कौन कवि आ रहा हैं ?
तोदी जी को कविताएं सुनाने का इतना गजब का शौक हैं कि कहीं बाग-बगीचों या सार्वजनिक जगहों यह तक अपने आवासीय परिसर में तथा जिस कॉम्प्लेक्स में भी जाते तो वहां के सुरक्षाकर्मियों व वाचमेनो तक को कविताएं सुनाने बैठ जाते। सूरत में तोदी जी का वर्तमान में लिया फ्लेट मेरे आवासीय परिसर से महज 2 किलो मीटर की दूरी पर होने से गत वर्ष तक तो वे वहां सप्ताह या पखवाड़े में पहुंच ही जाते थे और मेरे साथ गाड़ी में विवेकानंद गार्डन चलते और गार्डन में जो भी राह में या घास पर बैठे या वॉक करते मिल जाता तो उसे अपने पास रखी थैली से पुराने फोटो व कविताओं की अखबारी कटिंगों को अवश्य दिखाना शुरू कर देते। तीन वर्ष पूर्व तोदी जी का मेरे साथ गार्डन चलने का काफी संयोग हुआ, अतः उनसे चर्चा करता तो वे कहते नजर आते कि अब में ईश्वर ने मुझे बुलावा भेज दिया हैं, अतः अब में यहां से चला जाऊंगा, तो में इन्हें कहता कि नही आप अभी नही जाओगे, 13 वर्ष बाद यानी 100 वर्ष की आयु में ही जा पाओगे। तो वे बोलते हैं की मुझे भगवान महादेव मिले, अतः अब उन्होंने मुझे वहां बुला ही दिया हैं। तोदी जी ने कहा कि में ढाई महीना तक हावड़ा में रह कर वापस आ जाऊंगा, आकर आपके आयोजनों में अवश्य उपस्थित रहूंगा।
ये उल्लेखनीय है कि तोदीजी का जन्म राजस्थान के सीकर जिले के गरोड़ा कस्बे में हुआ था, और वे महज 12 वर्ष की उम्र में ही चलखिया (हावड़ा) में आकर बस गए थे। चलखिया में तोदीजी अभी भी उम्र के इस पड़ाव में साल भर में कुछ माह अपनी 98 वर्षों पुरानी व चाचाओं के सयुंक्त रुप से संचालित कपड़े की दुकान पर ड्यूटी देते नजर आते हैं।
राजस्थान तथा हावड़ा में पढ़ाई पूर्ण कर महज साढ़े सतरह वर्ष में वे वैवाहिक बन्धन में बंध गए थे।, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी पत्नी का शादी के महज डेढ़ वर्ष पश्चात ही देहांत हो गया था, फिर उन्होंने 19 वर्ष की आयु में दूसरी शादी सीतादेवी से कर डाली। तोदीजी के एक पुत्र रमण तोदी सूरत में व्यवसायरत हैं व तीन पुत्रियां हैं, उन तीनों की शादी कोलकाता में हुई हैं। बड़ी सपुत्री 60 वर्ष की हो गई हैं, तथा वे स्वयं नानी बन गई हैं। तोदी जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीतादेवी का कोरोना काल में दो वर्ष पूर्व 11 फरवरी को 84 वर्ष की उम्र मे आकस्मिक देहांत हो गया। धर्मपत्नी के चले जाने का गम बहुत है। लम्बे अंतराल के पश्चात दो वर्ष पूर्व 17 मार्च को जब वे मेरे साथ विवेकानंद गार्डन चले तो उन्होंने बड़े ही दुःखी मन से बताया कि घर वाली साथ छोड़ कर चली गई हैं। बहरहाल कविताएं सुनाने की इनके मन मे इतनी दीवानगी है कि जिस दिन वे कहीं पर कविताएं सुना कर घर लौटते हैं तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नही रहता, उनका मन-मयूर नाच उठता। आज कविता दिवस पर श्री तोदीजी के काव्यप्रेम को यहां उल्लेखित करते हुए मुझे अत्यंत हर्ष व गौरव की अनुभूति हो रही हैं। 
आलेख-गणपत भंसाली (सूरत)
9426119871
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