सूरत : प्री-मानसून कार्यों की पोल खुली, पांडेसरा में कीचड़ में धंसी सिटी बस, पाल-उमरा में बीआरटीएस फंसी
नई बनी सड़कों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, दो अलग-अलग घटनाओं से 7 यात्री घायल, यातायात व्यवस्था प्रभावित
सूरत : मानसून की शुरुआती बारिश ने सूरत महानगरपालिका के प्री-मानसून कार्यों और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के पांडेसरा और पाल-उमरा क्षेत्रों में हुई दो अलग-अलग घटनाओं ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में कथित लापरवाही को उजागर कर दिया है।
पांडेसरा के गणेशनगर औद्योगिक क्षेत्र में सड़क धंसने से बने एक बड़े सिंकहोल में पहले एक टेम्पो फंस गया और उसके बाद यात्रियों से भरी सिटी बस कीचड़ में धंस गई। इस हादसे में सात यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया।
जानकारी के अनुसार, गणेशनगर क्षेत्र में सड़क के नीचे की मिट्टी धंस जाने से सड़क के बीचों-बीच बड़ा गड्ढा बन गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस खतरनाक स्थिति के बावजूद प्रशासन की ओर से न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया।
सबसे पहले एक नैनो टेम्पो इस गड्ढे में फंस गया। जब उसे बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा था, तभी वहां से गुजर रही सूरत महानगरपालिका की सिटी बस भी फिसलन और कमजोर सड़क के कारण कीचड़ में धंस गई। बस के अचानक फंसने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और बस में सवार यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में सात यात्रियों को चोटें आईं, जिनमें कुछ को गंभीर चोट लगने की भी जानकारी मिली है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
दूसरी घटना पाल-उमरा ब्रिज के निकट सामने आई, जहां हाल ही में सड़क पर किसी उपयोगिता कार्य के लिए खुदाई की गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खुदाई के बाद सड़क का उचित कॉम्पेक्शन नहीं किया गया। बारिश के बाद मिट्टी ढीली पड़ने से सड़क की स्थिति खराब हो गई।
इसी दौरान वहां से गुजर रही एकबीआरटीएस बस के पहिए सड़क में धंस गए और बस बीच रास्ते में फंस गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। बाद में क्रेन की सहायता से बस को बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
दोनों घटनाओं के बाद नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर प्री-मानसून कार्य और सड़क मरम्मत के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सड़कों का धंस जाना निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थानीय नागरिकों ने दोनों मामलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
