सूरत : “मोदी हैं तो देश सुरक्षित, 2047 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन वाले भारत का लक्ष्य” : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल
विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान; प्राकृतिक खेती और सतत विकास पर दिया जोर
सूरत। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को लेकर राज्य एवं केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने देशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के दौर में देश के नागरिकों का विश्वास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और अधिक मजबूत हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। सरकार वर्ष 2047 तक भारत को कम-कार्बन और पर्यावरण-अनुकूल विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिए विभिन्न योजनाओं और नीतियों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार मिलकर अनेक पहल कर रही हैं।
इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और कृषि अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि भूमि की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक के साथ पर्यावरण-अनुकूल खेती पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।
अपने संबोधन में उन्होंने सतत विकास की अवधारणा को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन जैसे कार्य केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य हैं। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने और हरित वातावरण के निर्माण में सहयोग देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती और सतत विकास के प्रति सामूहिक संकल्प भी व्यक्त किया गया।
