वडोदरा : भारतीय रेल पर पहली बार रनिंग रेल लाइन पर रोड क्रॉलर क्रेन द्वारा हैवी एवं लम्बे स्टील ओपन वेब गर्डरों का सफल प्रतिस्थापन वडोदरा मंडल की उपलब्धि

महिसागर नदी पर स्थित 113 वर्ष पुराने रेलवे पुल के री-गर्डरिंग कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया

वडोदरा : भारतीय रेल पर पहली बार रनिंग रेल लाइन पर रोड क्रॉलर क्रेन द्वारा हैवी एवं लम्बे स्टील ओपन वेब गर्डरों का सफल प्रतिस्थापन वडोदरा मंडल की उपलब्धि

पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल द्वारा अहमदाबाद–वडोदरा रेलखंड पर महिसागर नदी के ऊपर स्थित ब्रिज संख्या 624 के सभी 8 स्पैनों के री-गर्डरिंग कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। यह भारतीय रेल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जहाँ रनिंग रेल लाइन पर 67.5 मीटर स्पैन तथा लगभग 320 टन वजनी स्टील ओपन वेब गर्डर का 600 टन एवं 800 टन क्षमता की रोड क्रॉलर क्रेनों की सहायता से प्रतिस्थापन भारतीय रेल में पहली बार किया गया है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर वडोदरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक राजू भडके ने बताया कि महिसागर नदी पर स्थित इस 113 वर्ष पुराने महत्वपूर्ण रेलवे पुल के सभी 8 स्पैनों का सफल री-गर्डरिंग कार्य वडोदरा मंडल की इंजीनियरिंग दक्षता, नवाचार और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में, निर्धारित समयसीमा के भीतर तथा न्यूनतम ब्लॉकों में पूरा किया गया है। इसके लिए उन्होंने इस कार्य से जुड़े ब्रिज, टीआरडी, पी-वे, ऑपरेटिंग, इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल विभागों के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी।

जलप्रवाह ने बनाया कार्य चुनौतीपूर्ण 

वर्ष 1913 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान निर्मित यह पुल महिसागर नदी पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे संरचना है। नदी में वर्षभर जल प्रवाह रहने के कारण इस पुल पर री-गर्डरिंग का कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। परियोजना के अंतर्गत 67.5 मीटर लंबे तथा लगभग 320 टन वजनी स्टील ओपन वेब गर्डरों का प्रतिस्थापन किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दो चरणों में पूरा किया गया। प्रथम चरण में पुल के मध्य स्थित 6 स्पैनों के गर्डरों का प्रतिस्थापन किया गया, जबकि द्वितीय चरण में शेष 2 एंड स्पैनों का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। संपूर्ण परियोजना मात्र एक वर्ष की अवधि में पूर्ण की गई तथा इसके लिए कुल 8 मेगा ब्लॉक लिए गए, जिनमें प्रत्येक ब्लॉक की अवधि लगभग साढ़े पाँच घंटे रही।

सुपर लिफ्ट वाली क्रेनों से हुई गर्डरों की लॉन्चिंग

मध्य के छह स्पैनों के री-गर्डरिंग कार्य के लिए 600 टन क्षमता की दो क्रॉलर टाइप रोड क्रेनों का उपयोग किया गया, जिनमें प्रत्येक पर 200 टन सुपर-लिफ्ट व्यवस्था उपलब्ध थी। नदी के भीतर क्रेनों की स्थापना हेतु विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सैंड पंप को बड़े बोट पर स्थापित कर लगभग 30 मीटर चौड़ा कृत्रिम सैंड बेड तैयार किया गया। इसी प्लेटफॉर्म पर क्रेनों को स्थापित कर गर्डरों का प्रतिस्थापन कार्य सुरक्षित एवं सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

पुल के दोनों एंड स्पैनों पर स्थान की कमी के कारण दो क्रेनों की तैनाती संभव नहीं थी। इस चुनौती का समाधान करते हुए इंजीनियरों ने 800 टन क्षमता की क्रॉलर टाइप रोड क्रेन का उपयोग कर एंड स्पैनों के गर्डरों का प्रतिस्थापन किया, जिसमें 300 टन सुपर-लिफ्ट व्यवस्था लगी हुई थी। इस अभिनव तकनीक के प्रयोग से लागत, ट्रैफिक ब्लॉक एवं पावर ब्लॉक में उल्लेखनीय बचत हुई। यह परियोजना उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, किसी भी रेलवे पर रोड क्रेन का उपयोग कर इतने बड़े स्पैन के स्टील ओपन वेब गर्डर का री-गर्डरिंग कार्य पूर्व में नहीं किया गया है।

महिसागर नदी पुल की री-गर्डरिंग परियोजना का सफल समापन पश्चिम रेलवे के आधारभूत संरचना उन्नयन कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे अहमदाबाद–वडोदरा रेलखंड पर सुरक्षा, विश्वसनीयता एवं परिचालन क्षमता में और अधिक वृद्धि होगी।

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