सूरत में ‘ब्रीदिंग सिटीज़’ डायलॉग: स्वच्छ हवा और ‘ब्रांड सूरत’ पर मंथन
SGCCI, IIA और IIID के संयुक्त आयोजन में एयर पॉल्यूशन, इनडोर प्रदूषण और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
सूरत। द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स (IIA) सूरत रीजनल चैप्टर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटीरियर डिज़ाइनर्स (IIID) के संयुक्त तत्वावधान में ‘ब्रीदिंग सिटीज़: ए मल्टी-स्टेकहोल्डर डायलॉग ऑन एयर पॉल्यूशन’ विषय पर एक हाई-लेवल पैनल डिस्कशन का आयोजन सरसाना स्थित उषाकांत मारफतिया हॉल में किया गया।
कार्यक्रम में स्वच्छ हवा, शहरी प्रदूषण, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और “ब्रांड सूरत” को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चैंबर अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि सूरत ने वर्ष 1994 के प्लेग संकट के बाद खुद को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि अब समय केवल चर्चा का नहीं, बल्कि प्रदूषण के खिलाफ ठोस कार्रवाई का है। उन्होंने मशहूर पंक्तियों “सीने में जलन, आँखों में तूफान सा क्यों है...” का उल्लेख करते हुए एयर पॉल्यूशन की गंभीरता को रेखांकित किया।
PM10 प्रदूषण में 33.84% की कमी : एम. नागराजन
मुख्य अतिथि और सूरत नगर निगम आयुक्त एम. नागराजन (आईएएस) ने कहा कि सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत मिले 322 करोड़ रुपये के फंड का 100 प्रतिशत उपयोग कर PM10 प्रदूषण स्तर में 33.84 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की है।
उन्होंने बताया कि शहर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क, सोलर पैनल, ग्रीन कवर, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक पार्कों के विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। साथ ही मेट्रो उपयोग बढ़ाने, साइकिल ट्रैक और साइकिल शेयरिंग सिस्टम को फिर से सक्रिय करने की योजना पर भी काम चल रहा है।
“घर के अंदर का प्रदूषण भी खतरनाक”
एलर्जी और अस्थमा विशेषज्ञ डॉ. समीर गामी ने कहा कि आधुनिक एसी युक्त बंद घरों में इनडोर एयर पॉल्यूशन तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि फफूंदी, धूल और कालीनों में मौजूद सूक्ष्म कण एलर्जी और अस्थमा के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि घरों को “स्टरलाइज्ड” नहीं बल्कि प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन वाला “स्वच्छ घर” बनाना अधिक जरूरी है।
“कंस्ट्रक्शन वेस्ट रीसायकल करना होगा”
सूरत ग्रीन प्रीकास्ट के CEO कन्नौज लखानी ने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष उत्पन्न होने वाले लगभग 500 मिलियन टन कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट में से केवल 1 प्रतिशत का ही रीसायकल हो पाता है, जबकि चीन में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। उन्होंने निर्माण मलबे के पुनर्चक्रण पर जोर दिया।
“नेचुरल ग्रीनरी और वर्टिकल ग्रीन वॉल्स की जरूरत”
नेचर क्लब सूरत के संस्थापक सदस्य स्नेहल पटेल ने कहा कि शहरों में केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्रदूषण सोखने वाले पेड़ लगाने की जरूरत है। उन्होंने वर्टिकल ग्रीन वॉल्स, हरित ट्रैफिक आइलैंड और प्राकृतिक हरियाली को बढ़ावा देने की अपील की।
उद्योगों का योगदान केवल 30 प्रतिशत : डॉ. भरत जैन
गुजरात क्लीनर प्रोडक्शन सेंटर के सदस्य सचिव डॉ. भरत जैन ने कहा कि कुल प्रदूषण में उद्योगों की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। उन्होंने संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और रीसायकल पानी व कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट जैसी पहल में गुजरात और सूरत की उपलब्धियों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री कृतिका शाह ने किया, जबकि प्रश्नोत्तर सत्र आर्किटेक्ट प्रकृति रामचंद्र ने संचालित किया। इस अवसर पर चैंबर के पूर्व अध्यक्ष विजय मेवावाला, मानद मंत्री बिजल जरीवाला सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति, आर्किटेक्ट्स और पर्यावरण विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
