सूरत : “प्रारंभ 2026” कार्यक्रम का आयोजन, नए आयकर अधिनियम-2025 पर जागरूकता अभियान शुरू

आयकर विभाग ने व्यापार, उद्योग और पेशेवर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद

सूरत : “प्रारंभ 2026” कार्यक्रम का आयोजन, नए आयकर अधिनियम-2025 पर जागरूकता अभियान शुरू

सूरत।  सूरत मुख्य आयकर आयुक्तालय के निर्देशन में प्रधान आयकर आयुक्त-1 कार्यालय द्वारा नए आयकर अधिनियम-2025 पर देशव्यापी जागरूकता अभियान “प्रारंभ 2026” का आयोजन गुरुवार को सिटी लाइट स्थित महाराजा अग्रसेन पेलेस के द्वारका हॉल में किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए आयकर अधिनियम-2025 के प्रावधानों, उसके कार्यान्वयन और करदाताओं के लिए किए गए सरलीकरण को लेकर जागरूकता फैलाना तथा विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सूरत के मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. एन. सी. स्वाइँ  उपस्थित रहे। इस अवसर पर  प्रिय रंजन घोष प्रधान आयकर निदेशक (जांच),सहित आयकर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में व्यापार, उद्योग, वस्त्र क्षेत्र और पेशेवर संगठनों के अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें जगदीश खुंट, सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष, राहुल अग्रवाल, आईसीएआई ब्रान्च सूरत, जीतेन्द्रभाई वखारीया साऊथ गुजरात टेक्सटाईल प्रोसेसर्स एसोसिएशन तथा फोस्टा प्रमुख कैलास हाकिम रूप से शामिल रहे।

इसके अलावा जे.पी. अग्रवाल, प्रमोद चौधरी, भरत अनधड, रोहन देसाई और फारुख पटेल  सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. एन. सी. स्वाइँ ने कहा कि बदलते वैश्विक डिजिटल वातावरण और तकनीकी क्रांति को ध्यान में रखते हुए नए आयकर अधिनियम-2025 को अधिसूचित किया गया है।

उन्होंने बताया कि पहले आयकर अधिनियम-1961 के अलग-अलग प्रावधानों को समझने के लिए कई धाराओं का अध्ययन करना पड़ता था, जबकि अब वेतन, व्यवसाय आय, कैपिटल गेन और अन्य स्रोतों से आय संबंधी प्रावधानों को सरल बनाकर व्यवस्थित रूप से एकीकृत किया गया है।

उन्होंने कहा कि नए अधिनियम का उद्देश्य करदाताओं को नियमों को आसानी से समझने और बिना विशेषज्ञ सहायता के उनका पालन करने में सक्षम बनाना है।

कार्यक्रम के आयोजक यु.बी.मिश्रा  ने कहा कि नए आयकर अधिनियम-2025 के जरिए जटिल प्रावधानों को सरल और अधिक व्यावहारिक स्वरूप दिया गया है। इससे करदाताओं को आयकर रिटर्न तैयार करने में आसानी होगी और प्रावधानों के सरलीकरण से अनावश्यक कानूनी विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

आयकर विभाग ने इस अभियान को करदाताओं के प्रति पारदर्शिता, जागरूकता और बेहतर सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।