सूरत : पत्नी और बेटी को गुज़ारा भत्ता नहीं देने पर पति को 110 दिन की जेल

फैमिली कोर्ट का सख्त रुख, रिकवरी वारंट के बावजूद भुगतान से बच रहा था आरोपी

सूरत : पत्नी और बेटी को गुज़ारा भत्ता नहीं देने पर पति को 110 दिन की जेल

सूरत।सूरत फैमिलि कोर्ट ने पत्नी और नाबालिग बेटी को गुज़ारा भत्ता नहीं देने वाले एक पति को 110 दिन की सादी कैद की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी लंबे समय से भरण-पोषण की राशि का भुगतान करने से बच रहा था और रिकवरी वारंट जारी होने के बावजूद सुनवाई से दूर रहकर फरार हो रहा था।

मामले के अनुसार, अडाजन निवासी महिला की शादी वर्ष 2006 में सूरत निवासी एक व्यक्ति से हुई थी, जो ब्रोकर के तौर पर काम करता है। विवाह के बाद दंपति को एक बेटी हुई, जो वर्तमान में अपनी मां के साथ रह रही है।

पत्नी ने कोर्ट में दायर आवेदन में आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे पता चला कि पति ने अपने बारे में कई गलत दावे किए थे। पति को शराब की लत थी और वह आए दिन पत्नी के साथ मारपीट करता था। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसके चरित्र पर संदेह करता था तथा दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देता था।

महिला के अनुसार, विवाह के कुछ वर्षों बाद ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना बढ़ा दी गई और वर्ष 2012 में उसे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद पति ने पत्नी और बेटी के भरण-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की।

 पीड़िता ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रिति जिग्नेश जोषी के माध्यम से फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की अर्जी दायर की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पति को पत्नी और बेटी के लिए कुल 8 हजार रुपये प्रतिमाह गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया था।

हालांकि, कोर्ट के आदेश के बावजूद आरोपी ने राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद पत्नी ने करीब ढाई लाख रुपये की बकाया राशि वसूलने के लिए रिकवरी आवेदन दाखिल किया। बताया गया कि आरोपी लगातार भुगतान से बचता रहा और वारंट जारी होने के बाद भी फरार रहा।

मामले की सुनवाई के दौरान एडिशनल जज ए.जे. मकवाणा ने आरोपी पति को 110 दिन की सादी जेल की सज़ा सुनाने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से अधिवक्ता प्रिति जिग्नेश जोषी और त्रिप्ती ठक्कर ने पैरवी की। कोर्ट रिकॉर्ड में पक्षकारों के नाम गोपनीय रखने के उद्देश्य से बदल दिए गए हैं।

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