सूरत : सूरत एयरपोर्ट की एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर एसजीसीसीआई  की केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से अहम बैठक

दुबई, शारजाह और बैंकॉक फ्लाइट्स दोबारा शुरू करने की मांग, सूरत एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर भी हुई विस्तृत चर्चा

सूरत : सूरत एयरपोर्ट की एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर एसजीसीसीआई  की केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से अहम बैठक

सूरत। नई दिल्ली में सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई ) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  किंजरापु राममोहन नायडू से मुलाकात कर सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट की एयर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एसजीसीसीआई के प्रेसिडेंट-डेजिग्नेट अशोक जीरावाला ने किया।

यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और नवसारी सांसद सी.आर. पाटील की विशेष मध्यस्थता और समन्वय से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर आयोजित की गई। बैठक में दक्षिण गुजरात की तेजी से बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट विकास पर विस्तार से चर्चा हुई।

सूरत को ‘पॉइंट ऑफ कॉल’ बनाने की मांग

एसजीसीसीआई ने प्रस्तुति में कहा कि सूरत देश का तेजी से उभरता हुआ आर्थिक केंद्र है, जहां डायमंड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल्स और MSME सेक्टर का वैश्विक प्रभाव है। इसके बावजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट घोषित होने के बाद भी यहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और आधुनिक सुविधाओं की कमी बनी हुई है।

प्रतिनिधिमंडल ने एयर सर्विस एग्रीमेंट (ASA) के तहत सूरत को “पॉइंट ऑफ कॉल” के रूप में शामिल करने की मांग की, ताकि अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन कंपनियों को सीधे सूरत से उड़ान संचालन की अनुमति मिल सके।

इसके साथ ही सूरत-दुबई, शारजाह और बैंकॉक के लिए पहले संचालित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को दोबारा शुरू करने का आग्रह किया गया। चैंबर ने बताया कि इन रूट्स पर बिजनेस ट्रैवलर्स, एनआरआई और गुजराती प्रवासियों की भारी मांग है।

मुंबई और भुवनेश्वर सहित नए शहरों से कनेक्टिविटी की मांग

बैठक में सूरत-मुंबई के बीच दैनिक उड़ानों की संख्या बढ़ाने तथा दिल्ली सेक्टर में अतिरिक्त फ्रीक्वेंसी शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया। इसके अलावा सूरत से भुवनेश्वर के लिए सीधी फ्लाइट शुरू करने की मांग की गई, ताकि ओडिशा और गुजरात के बीच श्रमिकों और उद्योगों को सुविधा मिल सके।

चैंबर ने जोधपुर, जैसलमेर, रांची, पटना, वाराणसी, कोच्चि, कोयंबटूर, इंदौर और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों के लिए भी एयर कनेक्टिविटी शुरू करने की आवश्यकता बताई। क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए अतिरिक्त UDAN रूट्स मंजूर करने का अनुरोध भी किया गया।

एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर जोर

प्रतिनिधिमंडल ने सूरत एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के एक साथ संचालन की अनुमति देने की मांग रखी। साथ ही निर्यातकों की मुंबई पर निर्भरता कम करने के लिए कस्टम क्लियरेंस सुविधा के साथ पूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्गो टर्मिनल विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया।

खराब मौसम में उड़ानों में देरी रोकने के लिए CAT-I लैंडिंग सिस्टम और एडवांस्ड अप्रोच लाइटिंग सिस्टम स्थापित करने की भी मांग की गई। इसके अलावा एयरपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री शॉप्स शुरू करने और पीपीपी मॉडल के तहत एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण का सुझाव भी रखा गया।

2047 मास्टर प्लान और भविष्य की तैयारी

चैंबर ने बताया कि वर्ष 2023 में सूरत एयरपोर्ट पर 25,520 वर्गमीटर का आधुनिक टर्मिनल विकसित किया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता 55 लाख यात्रियों की है। एयरपोर्ट पर 24x7 संचालन और नाइट पार्किंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

बैठक में एयरपोर्ट मास्टर प्लान-2047 के तहत भविष्य में हर वर्ष 2.25 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करने के विजन पर भी चर्चा हुई। साथ ही एयरसाइड ऑपरेशन में इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देने का सुझाव भी रखा गया।

मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  किंजरापु राममोहन नायडू ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और इन पर सकारात्मक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।

बैठक में एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी के सदस्य परेश पटेल, सुरेश अग्रवाल, केयूर खेनी, केवल शाह, प्रमोद चौधरी, विनोद अग्रवाल, कुंजविहारी सुल्तानिया, सुभाष पटोदिया, जे.पी. अग्रवाल, जीतूभाई वखारिया, आनंद देसाई, नागजीभाई साकरिया, भूरालाल शाह, कैलाश हकीम, विशाल बुधिया और भारत सुखडीया सहित दक्षिण गुजरात के कई उद्योगपति और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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