सूरत में शू फैब्रिक उद्योग की तेज़ रफ्तार, MSME यूनिट्स बना रहीं नई पहचान

पिछले एक दशक में उभरा शू फैब्रिक सेक्टर, रोज़ाना लाखों मीटर उत्पादन के साथ राष्ट्रीय बाजार में बढ़ती पकड़

सूरत में शू फैब्रिक उद्योग की तेज़ रफ्तार, MSME यूनिट्स बना रहीं नई पहचान

देश की टेक्सटाइल राजधानी माने जाने वाले सूरत में अब शू फैब्रिक (जूते के कपड़े) का उद्योग भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। जहां शहर की टेक्सटाइल इंडस्ट्री 30–40 साल पुरानी है, वहीं जूतों के लिए इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक का उत्पादन पिछले 8–12 वर्षों में शुरू हुआ और बीते 5–6 वर्षों में इसमें उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है।

टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े गिरधर गोपाल मूंदड़ा के अनुसार, स्पोर्ट्स और कैजुअल फुटवियर की बढ़ती मांग तथा चीन से आयात के विकल्प की आवश्यकता ने इस सेक्टर को गति दी है। सूरत पहले से ही पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे मैन-मेड फाइबर (MMF) में मजबूत रहा है, जो शू फैब्रिक का प्रमुख आधार है।

सूरत में कुल टेक्सटाइल उत्पादन लगभग 6.5 करोड़ मीटर प्रतिदिन आंका जाता है। हालांकि इसमें शू फैब्रिक की हिस्सेदारी अभी सीमित है, लेकिन यह तेजी से बढ़ रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, वर्तमान में शहर में प्रतिदिन लगभग 5 से 15 लाख मीटर शू फैब्रिक का उत्पादन हो रहा है। इसमें मेश, निटेड, PU कोटेड और नॉनवोवन जैसी विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि सूरत में शू फैब्रिक का उत्पादन मुख्य रूप से MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम) इकाइयों द्वारा किया जा रहा है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स यहां सीधे उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि स्थानीय निर्माताओं से फैब्रिक सोर्स करती हैं। इस क्षेत्र में सक्रिय कुछ प्रमुख यूनिट्स में शामिल हैं, जिसमें ओम टेक्सटाईल (PU लेदर शू फैब्रिक), प्रवीन ओवरसीज (लेडीज़ फुटवियर फैब्रिक), रेडियंस स्पूनबांड प्रा.लिमिटेड (नॉनवोवन फैब्रिक), निमबर्क फैब्रिक्स (निटेड फैब्रिक), श्रीयान टेक्सफैब (स्पोर्ट्स फैब्रिक), सुदामो इम्पेक्स (मधुसूदन ग्रुप) एवं स्टार नीट्स का समावेश है। 

वर्तमान में टेक्सटाइल उद्योग लागत बढ़ने और मांग में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। कच्चे तेल और यार्न की कीमतों में वृद्धि के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है, जिससे कुछ यूनिट्स ने उत्पादन धीमा भी किया है। इसके बावजूद शू फैब्रिक सेक्टर विकास के चरण में है। खासकर स्पोर्ट्स, कैजुअल और महिला फुटवियर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 3–5 वर्षों में यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सेगमेंट बन सकता है।

सूरत में इस उद्योग के तेजी से विकसित होने के पीछे कई प्रमुख कारण है, जिसमें MMF का मजबूत आधार यानी पॉलिएस्टर और नायलॉन उत्पादन में सूरत देश का अग्रणी केंद्र है। यार्न से लेकर वीविंग, डाइंग, कोटिंग और फिनिशिंग तक सभी प्रक्रियाएं एक ही शहर में मौजूद हैं। इसके अलावा एयरजेट, वाटरजेट और निटिंग मशीनों से हाई-स्पीड उत्पादन संभव है। चीन के मुकाबले किफायती उत्पादन और श्रम लागत का लाभ। आगरा, दिल्ली और दक्षिण भारत के फुटवियर हब सूरत से बड़े पैमाने पर सोर्सिंग करते हैं। छोटी इकाइयां तेजी से डिजाइन बदल सकती हैं और कम मात्रा में भी उत्पादन संभव है। साफ है कि सूरत का शू फैब्रिक उद्योग अभी उभरते दौर में है, लेकिन मौजूदा रफ्तार को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह शहर को एक नए औद्योगिक आयाम तक ले जा सकता है।

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