गुजरात में खाने के तेल की पैकेजिंग और बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

“श्रिंकफ्लेशन” के जरिए उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप, तेल मिलर्स और व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

गुजरात में खाने के तेल की पैकेजिंग और बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

सूरत। गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी दर्शनकुमार ए. नायक ने गुजरात में खाने के तेल की घटती पैकेजिंग, लगातार बढ़ती कीमतों और “श्रिंकफ्लेशन” जैसी प्रथाओं को लेकर राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल मिलर्स और व्यापारियों द्वारा पैकेजिंग का वजन कम कर उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गुजरात देश के सबसे बड़े तिलहन उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य में मूंगफली और कपास का बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बावजूद आम लोगों को खाने का तेल ऊंची कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से स्वास्थ्य और आयात खर्च कम करने के लिए तेल का सीमित उपयोग करने की अपील का स्वागत करते हुए कहा कि यह देशहित में सराहनीय पहल है। हालांकि, दूसरी ओर बाजार में “श्रिंकफ्लेशन” के जरिए ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है।

दर्शनकुमार नायक ने कहा कि पहले खाने का तेल 15 किलो या 15 लीटर के डिब्बों में मिलता था, लेकिन अब अधिकांश कंपनियों ने पैकिंग घटाकर 12.5 किलो, 13 किलो या 13 लीटर कर दी है।

इसके बावजूद कीमतों में कोई राहत नहीं दी गई और बाजार में तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ सीधी आर्थिक लूट बताया।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 46 से 66 लाख मीट्रिक टन के बीच दर्ज किया गया है, जो देश के कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक है।

इसके बावजूद मूंगफली तेल के एक कैन की कीमत 2341 रुपये से 2719 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कपास उत्पादन भी लगभग 92.48 लाख गांठ दर्ज किया गया है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि 15 किलो और 15 लीटर की पैकेजिंग को घटाकर 12.5 से 13 किलो/लीटर करने की अनुमति किस प्राधिकरण ने दी, क्या इसके लिए लीगल मेट्रोलॉजी विभाग द्वारा कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी, और यदि पैकेजिंग कम की गई है तो कीमतों में उसी अनुपात में कमी क्यों नहीं की गई।

कांग्रेस नेता ने मांग की कि खाने के तेल की पैकेजिंग में बदलाव और “श्रिंकफ्लेशन” की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित की जाए। साथ ही तेल मिलर्स, होलसेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा संभावित जमाखोरी और कार्टेलाइजेशन के खिलाफ छापेमारी कर सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि खाने के तेल के डिब्बों पर “पुराना वजन, नया वजन और प्रति किलो/लीटर वास्तविक कीमत” अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का नियम बनाया जाए और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

दर्शनकुमार नायक ने कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य संबंधी अपील को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बाजार में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करे और लोगों को उचित कीमतों पर पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराए।