सूरत : वेल्थ एक्सपो 2026 में नैतिक निवेश पर जोर: “पैसा कमाने के साथ यह भी सीखें कि उसे कहाँ खर्च करना है” — गोविंद ढोलकिया

SGCCI और JITO के आयोजन में राहुल कपूर जैन ने कहा — “धर्म और नैतिकता के दायरे में रहकर भी बनाई जा सकती है करोड़ों की कंपनी”

सूरत : वेल्थ एक्सपो 2026 में नैतिक निवेश पर जोर: “पैसा कमाने के साथ यह भी सीखें कि उसे कहाँ खर्च करना है” — गोविंद ढोलकिया

सूरत।सूरत में आयोजित ‘वेल्थ एक्सपो 2026’ के दूसरे दिन धन कमाने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित विशेष सत्र ने उद्योगपतियों और युवा निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।

द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) और JITO सूरत द्वारा सरसाना में आयोजित इस एक्सपो में “वेल्थ बियॉन्ड वेल्थ” विषय पर आयोजित सत्र में राज्यसभा सांसद और उद्योगपति गोविंदभाई ढोलकिया तथा प्रसिद्ध माइंडसेट कोच एवं लेखक राहुल कपूर जैन ने संबोधित किया।

दोनों वक्ताओं ने धन सृजन के साथ नैतिकता, मानवता और सही मूल्यों के महत्व पर जोर देते हुए उद्योग जगत को संतुलित और जिम्मेदार सोच अपनाने का संदेश दिया।

“हर फैसले से पहले खुद से पूछें — धर्म है या अधर्म”
माइंडसेट कोच और लेखक राहुल कपूर जैन ने कहा कि किसी व्यक्ति के पास कितना धन होगा, यह उसके कर्मों और सोच पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “ईमानदारी केवल व्यवसाय में नहीं, बल्कि जीवन में भी होनी चाहिए। उद्योगपतियों को हर बड़े निर्णय से पहले अपने मन से पूछना चाहिए कि यह धर्म से जुड़ा है या अधर्म से।”

उन्होंने कहा कि नैतिकता के दायरे में रहकर भी बड़ी और सफल कंपनियां खड़ी की जा सकती हैं। “जो लोग धर्म और मूल्यों के साथ कारोबार करते हैं, वही सच्चे अर्थों में सुकून की नींद सो पाते हैं,” उन्होंने कहा। राहुल कपूर जैन ने उपस्थित उद्योगपतियों और निवेशकों को अपनी सोच और कार्यशैली को 100 दिनों तक सकारात्मक रूप से चुनौती देने की सलाह भी दी।

“असल संपत्ति वही है, जिसका सही उपयोग किया जाए” — गोविंद ढोलकिया
राज्यसभा सांसद और उद्योगपति गोविंदभाई ढोलकिया ने अपने संबोधन में कहा कि केवल धन अर्जित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि उस धन का उपयोग कहाँ और कैसे किया जाए।

उन्होंने कहा, “ईमानदारी के बिना व्यवसाय, उसूलों के बिना राजनीति, चरित्र के बिना व्यवहार और संस्कारों के बिना शिक्षा का कोई मूल्य नहीं है।”
कीमत और वास्तविक मूल्य के अंतर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि कागजों पर कंपनियों की कीमत करोड़ों में हो सकती है, लेकिन वास्तविक संपत्ति वही है जिसका सदुपयोग समाज और मानवता के लिए किया जाए।

उन्होंने ‘धर्म बढ़ता है तो दौलत बढ़ती है’ का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यहां धर्म का अर्थ मानवता और नैतिकता से है।

गोविंदभाई ढोलकिया ने अपने व्यवसायिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगवान के नाम और नैतिक मूल्यों के साथ शुरू किया गया व्यापार ही लंबे समय में स्थायी सफलता प्राप्त करता है।

उद्योगपतियों और युवा निवेशकों की बड़ी मौजूदगी
इस विशेष सत्र में सूरत के कई बड़े उद्योगपति, वित्तीय सलाहकार और बड़ी संख्या में युवा निवेशक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में चैंबर के वाइस प्रेसिडेंट अशोक जीरावाला ने सभी वक्ताओं और उपस्थित मेहमानों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र लोगों को “सच्ची दौलत” के वास्तविक अर्थ को समझने में मदद करेगा।

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