सूरत : FDY-POY धागों पर फिर बढ़ा विवाद: हाईकोर्ट में याचिका से कपड़ा उद्योग में चिंता
BIS/QCO प्रतिबंध हटाने की केंद्र की अधिसूचना पर अंतरिम रोक, बुनकरों ने कीमतें बढ़ने और रोजगार पर असर की जताई आशंका
सूरत। सिंथेटिक धागा उद्योग में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। केंद्र सरकार द्वारा FDY (फुली ड्रॉन यार्न) और POY (पार्टियली ओरिएंटेड यार्न) धागों पर से BIS/QCO प्रतिबंध हटाने के फैसले के बाद अब इस मुद्दे ने कानूनी मोड़ ले लिया है।
कुछ स्पिनर्स द्वारा गुजरात हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अंतरिम रोक (स्टे) मिलने से कपड़ा उद्योग से जुड़े बुनकरों और निटर्स में चिंता बढ़ गई है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर इन धागों पर लागू BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) और QCO (क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर) से छूट दी थी। इस फैसले का उद्देश्य बुनकरों और निटर्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चा माल उपलब्ध कराना था, जिससे उत्पादन लागत कम हो सके और निर्यात को बढ़ावा मिले।
हालांकि, इस अधिसूचना के खिलाफ कुछ स्पिनिंग यूनिट्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रतिबंध दोबारा लागू करने की मांग की। अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद फिलहाल यह छूट प्रभावी नहीं रह गई है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रतिबंध फिर से लागू होते हैं, तो धागों की कीमतों में बढ़ोतरी तय है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के बुनकरों पर सीधा आर्थिक दबाव पड़ेगा। साथ ही, बाजार में अनियमितताओं और कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है।
सचिन औद्योगिक क्षेत्र के सचिव मयूर गोलवाला ने कहा कि इस स्थिति से कपड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर रोजगार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर बुनकरों के हित में शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला MSME सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि सूरत जैसे शहरों में बड़ी संख्या में लोग कपड़ा उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में नीति और न्यायिक फैसलों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
