सूरत : पुलिस थानों में क्रॉस-शिकायतों के बढ़ते दबाव पर उठे सवाल, वरिष्ठ वकील प्रीति जोशी ने डीजीपी से मांगी गाइडलाइन

बुजुर्ग शिकायतकर्ताओं और वकीलों के मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग, उप मुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को लिखा पत्र 

सूरत : पुलिस थानों में क्रॉस-शिकायतों के बढ़ते दबाव पर उठे सवाल, वरिष्ठ वकील प्रीति जोशी ने डीजीपी से मांगी गाइडलाइन

सूरत। राज्य के पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं गुजरात बार काऊन्सील सदस्य प्रीति जिग्नेश जोशी ने उप मुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कई मामलों में शिकायतकर्ता, खासकर बुजुर्ग और वकीलों के साथ, विरोधी पक्ष की ओर से जबरन क्रॉस-शिकायत दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता है।

पिछले 32 वर्षों से न्यायिक सेवा में सक्रिय अधिवक्ता प्रीति जोशी ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति न केवल कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती है।

उन्होंने जेतपुर, बालासिनोर, भरूच और करजन सहित विभिन्न स्थानों के उदाहरण देते हुए बताया कि कई मामलों में बुजुर्गों के साथ हिंसा, हमले और धमकी की घटनाओं के बावजूद पुलिस द्वारा समानांतर क्रॉस-शिकायत लेने की ज़िद की जाती है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस को अनिवार्य रूप से FIR दर्ज करनी होती है। ऐसे में झूठी या दबाव में ली गई क्रॉस-शिकायतें न केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, बल्कि वास्तविक शिकायत की गंभीरता को भी कम कर देती हैं।

अधिवक्ता प्रीति जोशी ने यह भी कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से मूल शिकायतकर्ता को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसमें जांच में देरी, आर्थिक और मानसिक दबाव, समझौते के लिए मजबूरी और खुद आरोपी बनने का खतरा शामिल है। साथ ही, कोर्ट में साक्ष्यों के टकराव के कारण वास्तविक दोषियों को सजा दिलाना भी मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने यह भी चिंता जताई कि पुलिस द्वारा दोनों पक्षों से शिकायत लेने की प्रवृत्ति से न्यायिक प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है, जिससे पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय नहीं मिल पाता।

इस संदर्भ में अधिवक्ता प्रीति जोशी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मांग की है कि सभी पुलिस थानों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इन दिशा-निर्देशों में यह सुनिश्चित किया जाए कि शिकायतकर्ता, विशेष रूप से वकील या बुजुर्ग होने की स्थिति में, बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और कानूनसम्मत जांच की जाए तथा अनावश्यक क्रॉस-शिकायतों से बचा जाए।

उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा जताई है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था की गरिमा बनी रहे।