ट्रंप की जिद का खामियाजा भुगत रहा अमेरिका, जंग में फूंक दिए 25 अरब डॉलर

ट्रंप की जिद का खामियाजा भुगत रहा अमेरिका, जंग में फूंक दिए 25 अरब डॉलर

वॉशिंगटन, 01 मई (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब केवल मोर्चों पर गोलाबारी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक विनाशकारी आर्थिक बोझ की कहानी बनता जा रहा है।

पेंटागन ने पहली बार इस युद्ध की आधिकारिक लागत का खुलासा करते हुए बताया है कि अब तक इस सैन्य अभियान पर करीब 25 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह राशि नासा के कुल सालाना बजट के लगभग बराबर है, जो इस टकराव की भयावहता को दर्शाती है।

पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी जूल्स हर्स्ट ने अमेरिकी सांसदों को सूचित किया कि इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति में खर्च हुआ है।

हालांकि, इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या इसमें भविष्य के संभावित नुकसान और पुनर्निर्माण की लागत शामिल है। इस खुलासे के बाद अमेरिकी संसद में तीखी बहस छिड़ गई है। सांसद एडम स्मिथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद अब जाकर खर्च की कोई स्पष्ट संख्या सामने आई है।

दूसरी ओर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस खर्च का बचाव करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए किसी भी कीमत को चुकाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत की जा रही यह कार्रवाई एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने अमेरिका को न केवल आर्थिक बल्कि मानवीय क्षति भी पहुंचाई है। अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिकों और एयरक्राफ्ट कैरियर्स की तैनाती ने वित्तीय दबाव को और बढ़ा दिया है।

यह स्थिति तब है जब अमेरिका स्वयं महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है। सर्वे बताते हैं कि केवल 34 फीसदी अमेरिकी जनता ही इस युद्ध के पक्ष में है।

ईरान की स्थिति और भी बदतर है। युद्ध और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान की करेंसी रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर (1.8 मिलियन प्रति डॉलर) पर गिर गई है। वहां दूध, चावल और तेल जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर जारी तनाव ने वैश्विक बाजार को भी प्रभावित किया है, जिससे दुनिया भर में ईंधन और खाद्य सामग्री की कीमतों में उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने और युद्ध विराम की अपील कर रहा है।