सूरत :  नगर निगम चुनाव प्रचार थमा, अंदरखाने तेज़ हुई सियासी हलचल

वराछा-कतारगाम में त्रिकोणीय मुकाबला रोचक, अंतिम घंटों में जोड़-तोड़ और रणनीति पर सबकी नजर

सूरत :  नगर निगम चुनाव प्रचार थमा, अंदरखाने तेज़ हुई सियासी हलचल

सूरत। सूरत नगर निगम चुनाव 2026 के लिए प्रचार अभियान थमने के साथ ही शहर में सतही तौर पर शांति दिखाई दे रही है, लेकिन अंदरखाने राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं।

खासकर वराछा-कतारगाम और लिंबायत जैसे इलाकों में मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है, जहां प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर देखी जा रही है।

करीब 10 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली सूरत नगर निगम पर कब्ज़ा जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। हालांकि, वराछा-कतारगाम जैसे पाटीदार बहुल क्षेत्रों में मुकाबला और भी अधिक रोचक हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, टिकट वितरण के बाद कई जगहों पर असंतोष और अंदरूनी मतभेद उभरकर सामने आए हैं, जिसका असर चुनाव के अंतिम चरण में भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख दलों के उम्मीदवार अब खुले तौर पर नहीं, बल्कि अंदरूनी रणनीतियों और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतिम समय में डोर-टू-डोर प्रचार, छोटी बैठकों और समाज आधारित संपर्क अभियानों के जरिए वोटरों को प्रभावित करने के प्रयास तेज़ हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आखिरी घंटों में होने वाली रणनीतिक चालें चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

भाजपा के लिए इस बार संगठनात्मक अनुभव की कमी एक चुनौती के रूप में देखी जा रही है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में विधायकों को खुद मोर्चा संभालना पड़ रहा है। वहीं आप में भी उम्मीदवारों के बीच मतभेद और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव प्रचार भले ही थम गया हो, लेकिन सूरत का राजनीतिक माहौल अब भी गरमाया हुआ है। सभी की निगाहें अब मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि अंतिम समय की रणनीतियों का किसे कितना फायदा मिला।