सूरत : शेलडिया परिवार की सेवा परंपरा बनी मिसाल, 106 लोगों ने लिया नेत्रदान-देहदान का संकल्प
106 वर्षीय सोनबाई बा से प्रेरित पांच पीढ़ियों का अनूठा योगदान, रक्तदान शिविर और भजन कार्यक्रम का आयोजन
स्वामिनारायण भगवान की कृपा से बड़े समढियाला गांव के भगत वीरबापा शेलडिया परिवार की प्रेरणादायक सेवा परंपरा आज समाज के लिए एक आदर्श बनकर उभरी है। पूर्व मेयर अस्मिताबेन शिरोया के मायके पक्ष से जुड़े इस परिवार की सामाजिक सेवाएं लगातार नई पीढ़ियों को प्रेरित कर रही हैं।
डॉ. प्रफुल्ल शिरोया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अक्षरनिवासी सोनबाई बा (106 वर्ष) ने अपने जीवनकाल में पांच पीढ़ियों को देखा और “नेत्रदान महादान” के संकल्प को साकार करते हुए मृत्यु के बाद नेत्रदान किया। उनके पति अक्षरनिवासी बचुबापा, जो बड़े समढियाला गांव के प्रतिष्ठित ग्रामश्रेष्ठी थे, ने भी जीवनभर समाज सेवा करते हुए मृत्यु के पश्चात चक्षुदान किया।
इन्हीं उच्च संस्कारों से प्रेरित होकर उनके बड़े पुत्र अक्षरनिवासी बाबुभाई बचुभाई शेलडिया ने भी नेत्रदान कर परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाया। वहीं परिवार की देवरानी अक्षरनिवासी दिवालीबेन भीखाभाई शेलडिया ने सूरत में निधन के बाद नेत्रदान के साथ देहदान कर समाज को नई दिशा दी।
परिवार के वडीलों के इन आदर्शों से प्रेरणा लेकर आज पूरे शेलडिया परिवार ने नेत्रदान और देहदान का महा संकल्प लिया है। सोनबाई बा की पांच पीढ़ियों के अनेक सदस्यों ने इस महान कार्य के लिए आगे आकर समाज में एक नई मिसाल कायम की है।
बारहवीं की विधि के अवसर पर मंगलवार को 106 लोगों ने मृत्यु के बाद नेत्रदान, देहदान एवं अंगदान का संकल्प लिया। इस अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया, जबकि भगीरथ युवक मंडल द्वारा भजन-धुन का भावपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में दिनेशभाई जोगाणी, लायन किशोर मंगरोलिया, लायन जगदीश बोडरा, सौराष्ट्र पटेल समाज, लोक दृष्टि आई बैंक, रेड क्रॉस ब्लड बैंक सूरत तथा लायंस क्लब ऑफ सूरत ईस्ट के सदस्यों ने परिवार की इस महान सेवा भावना की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
