सूरत : खजोद डंपिंग साइट पर धुएं पर काबू पाने के लिए बायो-एंजाइम का प्रयोग
ड्रोन स्प्रे, CCTV मॉनिटरिंग और पानी की स्थायी व्यवस्था के साथ नगर निगम का इंटेंसिव एक्शन
सूरत। शहर के खजोद डंपिंग साइट पर लगी आग के बाद लंबे समय तक उठते धुएं पर नियंत्रण पाने के लिए नगर निगम ने अब नई तकनीक और एक्सपेरिमेंटल उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं। 24 मार्च को खजोद क्षेत्र में RDF (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) में भीषण आग लगने के बाद हालात गंभीर हो गए थे, जो तेज हवा के कारण पास के सैनिटरी लैंडफिल तक फैल गई थी।
फायर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 10 फायर टेंडर और करीब 82 लाख लीटर पानी की मदद से 26 मार्च को आग पर काबू पा लिया था। आग को दोबारा फैलने से रोकने के लिए 18 पोकलेन और JCB मशीनों की मदद से 140 ट्रकों द्वारा 250 से अधिक चक्कर लगाए गए और लगभग 1500 टन मिट्टी डालकर कचरे को ढंका गया।
हालांकि, कचरे के अंदरूनी हिस्सों में सुलगती आग के कारण 8 अप्रैल तक लगातार धुआं निकलने की समस्या बनी रही। नगर निगम के अनुसार, इसका मुख्य कारण अधूरी जलन, मीथेन गैस का उत्सर्जन और तेज हवा का प्रभाव रहा।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए 8 अप्रैल को आयोजित बैठक में विशेषज्ञों ने ‘बायोकल्चर’ के उपयोग का सुझाव दिया। इसके तहत अहमदाबाद के एक विशेषज्ञ द्वारा तैयार ‘रेनजाइम’ नामक बायो-एंजाइम का डेमो किया गया, जो मीथेन गैस को तोड़कर आग और धुएं को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकता है।
नगर निगम अब इस बायो-एंजाइम को ड्रोन के माध्यम से स्प्रे करने की संभावना भी तलाश रहा है, ताकि कचरे के अंदरूनी हिस्सों तक आसानी से पहुंचा जा सके।
भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए खजोद के पास स्थित ड्रीम सिटी में 5 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी से साइट तक लगातार पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए स्थायी पंपिंग सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे फायर टेंडरों को दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने की जरूरत न पड़े।
इसके साथ ही, साइट पर मीथेन गैस से संभावित आग की घटनाओं को रोकने के लिए CCTV कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी और मॉनिटरिंग की जा रही है।
नगर निगम की यह पहल आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय समाधान के जरिए शहर में कचरा प्रबंधन और आपदा नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
