सूरत : बैंक ऑफ बड़ौदा का बड़ा कदम: ‘बॉब संवाद’ से अब 22 भाषाओं में होगी आसान बैंकिंग
एआई-संचालित बहुभाषी प्लेटफॉर्म से ग्राहक और बैंक स्टाफ के बीच रीयल-टाइम संवाद, समावेशी बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा
सूरत। बैंक ऑफ बड़ौदा ने ग्राहक सेवा को और अधिक सरल और समावेशी बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए ‘बॉब संवाद’ (bob SAMVAD) नामक एआई-संचालित बहुभाषी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
इस प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ 28 मार्च 2026 को मुंबई में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव एम. नागराजू द्वारा किया गया।
‘बॉब संवाद’ बैंकिंग क्षेत्र का पहला ऐसा इन-हाउस विकसित एआई प्लेटफॉर्म है, जो 22 भारतीय भाषाओं में लो-लेटेंसी के साथ रीयल-टाइम में दो लोगों के बीच सहज और सटीक बातचीत संभव बनाता है।
इसका उद्देश्य शाखाओं में ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों के बीच भाषा संबंधी बाधाओं को खत्म करना है।
कार्यक्रम में श्री एम. नागराजू ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘बॉब संवाद’ तकनीक के माध्यम से समावेशी बैंकिंग को बढ़ावा देगा और ग्राहक सेवा को मजबूत बनाएगा। उन्होंने इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए एक नया मानक बताते हुए कहा कि इससे विभिन्न भाषाओं के ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
इस अवसर पर बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. देबदत्त चांद ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म ग्राहक-केंद्रित डिज़ाइन और अत्याधुनिक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि ‘बॉब संवाद’ के माध्यम से ग्राहक अपनी पसंदीदा भाषा में बात कर सकते हैं या लिख सकते हैं, जिसका तुरंत अनुवाद स्टाफ की भाषा में हो जाता है और स्टाफ का जवाब भी ग्राहक की भाषा में अनुवादित हो जाता है।
यह प्लेटफॉर्म न केवल टेक्स्ट, बल्कि वॉयस मोड में भी उपलब्ध है, जिससे पढ़ने के बजाय सुनने वाले ग्राहकों के लिए भी यह पूरी तरह सुलभ है। बातचीत स्क्रीन पर टेक्स्ट के रूप में भी दिखाई देती है, जिससे समझ और पारदर्शिता दोनों बढ़ती हैं।
इसके साथ ही, श्री नागराजू ने बैंक की एक और हरित पहल ‘बॉब फॉरेस्ट’ का भी दौरा किया, जो मुंबई के बीकेसी स्थित कार्यालय में विकसित 6,000 वर्ग फुट का एक हरित उद्यान है। यह पहल बैंक की पर्यावरणीय और सतत विकास (ESG) के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पहले चरण में ‘बॉब संवाद’ को तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की 250 शाखाओं में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा।
यह नई तकनीक न केवल बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाएगी, बल्कि भारत की भाषाई विविधता को सम्मान देते हुए ग्राहकों को बेहतर और सहज अनुभव प्रदान करेगी।
