सूरत में ‘इंडिया रफ डायमंड शो’ लॉन्च, ग्लोबल टेंडरिंग हब बनने की दिशा में बड़ा कदम
GJEPC और SIDC की पहल से MSME व्यापारियों को मिलेगा सीधा फायदा, ₹1,000 करोड़ के रफ डायमंड प्रदर्शित होने की उम्मीद
सूरत। रत्न एवं आभूषण उद्योग को नई दिशा देते हुए जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने सूरत इंटरनेशनल डायाट्रेड सेंटर (SIDC) के साथ मिलकर ‘इंडिया रफ डायमंड शो’ (IRDS) लॉन्च किया है। यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर रफ डायमंड टेंडरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह शो 6 अप्रैल से 10 मई 2026 तक सूरत डायमंड बोर्स (SDB) में आयोजित किया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा ऑफिस कॉम्प्लेक्स है और हीरा व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता है। IRDS के माध्यम से पहली बार भारत में रफ डायमंड के लिए एक संगठित और पारदर्शी टेंडरिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय केंद्रों पर निर्भरता कम होगी।
इस आयोजन में स्टार जेम्स और कोइन इंटरनेशनल जैसी वैश्विक कंपनियों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा मजबूत हुआ है। अनुमान है कि शो के दौरान करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1,000 करोड़) मूल्य के रफ डायमंड प्रदर्शित किए जाएंगे।
खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म से छोटे और मध्यम स्तर के हीरा निर्माता (MSME) भी सीधे रफ डायमंड तक पहुंच बना सकेंगे। हर सप्ताह होने वाले टेंडर सत्रों में 250 से अधिक MSME यूनिट्स के शामिल होने की उम्मीद है, जबकि पूरे आयोजन में 1,000 से ज्यादा यूनिट्स की भागीदारी संभव है।
GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा कि यह पहल भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के करीब ग्लोबल सप्लाई लाने का बड़ा प्रयास है, जिससे लागत कम होगी और व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी। वहीं, डायमंड पैनल कन्वीनर अनूप मेहता ने इसे इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही जरूरत का समाधान बताया।
रीजनल चेयरमैन जयंती सावलिया ने कहा कि सूरत में इस शो का आयोजन शहर की डायमंड इंडस्ट्री में वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगा और स्थानीय व्यापारियों को बेहतर अवसर प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि भारत दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक हीरों की प्रोसेसिंग करता है, लेकिन रफ डायमंड का अधिकांश व्यापार अब तक एंटवर्प, दुबई और तेल अवीव जैसे केंद्रों में होता रहा है। IRDS के जरिए इस व्यवस्था को भारत में लाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह पहल न केवल व्यापार को आसान बनाएगी, बल्कि भारत को ग्लोबल डायमंड वैल्यू चेन में एक मजबूत ट्रेडिंग हब के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
