सूरत : मिडिल ईस्ट तनाव का असर: सूरत के फ्रूट मार्केट में संकट, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट ठप

होर्मुज रूट प्रभावित होने से विदेशी फलों की सप्लाई रुकी, लोकल किसानों को भी झटका

सूरत : मिडिल ईस्ट तनाव का असर: सूरत के फ्रूट मार्केट में संकट, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट ठप

सूरत। सूरत समेत दक्षिण गुजरात में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब फ्रूट इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई देने लगा है। होर्मुज की खाड़ी में बने हालात के कारण विदेशी फलों की सप्लाई बाधित हो गई है, वहीं भारत से होने वाला एक्सपोर्ट भी प्रभावित हुआ है।

जानकारी के मुताबिक, ईरान के रास्ते आने वाले फल पहले नवाशेवा पोर्ट तक लगभग 10 दिनों में पहुंच जाते थे, लेकिन मौजूदा हालात में यह समय बढ़कर करीब एक महीने तक पहुंच गया है। लंबी ट्रांजिट अवधि के कारण कंटेनरों में फल खराब होने लगे हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने के चलते इंपोर्टेड फलों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर ईरान से आने वाले कीवी और सेब की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिससे बाजार में इनकी कमी महसूस की जा रही है।

दूसरी ओर, भारत से दुबई, कतर, सऊदी अरब और इज़राइल जैसे देशों में भेजे जाने वाले आम, अंगूर और टमाटर का एक्सपोर्ट भी प्रभावित हुआ है।

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर सूरत जिले के केला उत्पादकों पर पड़ा है। एक्सपोर्ट रुकने के कारण बड़ी मात्रा में केला लोकल मार्केट में आ रहा है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आई है। जो केले पहले 20 से 22 रुपये प्रति दर्जन बिकते थे, वे अब 10 से 15 रुपये प्रति दर्जन में बेचे जा रहे हैं।

फ्रूट मार्केट के व्यापारियों और एक्सपोर्टर्स को इस स्थिति से लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। फिलहाल, सभी की नजरें मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होने और व्यापारिक गतिविधियों के फिर से पटरी पर लौटने पर टिकी हुई हैं।

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