सूरत : वर्ल्ड ऑटिज़्म डे पर सूरत में जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच
न्यू सिविल हॉस्पिटल के DEIC सेंटर में प्रतियोगिताएं और काउंसलिंग सेशन आयोजित, ‘जल्दी पहचान और इलाज’ पर दिया जोर
2 अप्रैल को विश्वभर में मनाए जाने वाले ‘वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे’ के अवसर पर सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वर्ष 2026 में यह 19वां विश्व ऑटिज़्म दिवस मनाया गया। इस दिन की शुरुआत United Nations General Assembly द्वारा दिसंबर 2007 में पारित प्रस्ताव के बाद 2008 से हर वर्ष 2 अप्रैल को ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।
गुजरात सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में न्यू सिविल हॉस्पिटल स्थित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) द्वारा यह कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को ‘प्रारंभिक निदान और प्रारंभिक उपचार’ के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता, म्यूजिकल चेयर, बैलेंसिंग जैसे खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें विशेष बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में एकाग्रता और सामाजिक समन्वय को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र, रंग, फल और अन्य उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया।
इसके साथ ही माता-पिता के लिए विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विशेषज्ञों ने ऑटिज़्म के लक्षणों, समय पर पहचान और उपचार की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
न्यू सिविल हॉस्पिटल के DEIC सेंटर में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम सेवाएं दे रही है। यहां चिकित्सा अधिकारी, दंत चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, विशेष शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, स्टाफ नर्स के साथ स्पीच थेरेपी और श्रवण सेवाएं उपलब्ध हैं।
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धारित्री परमार, DEIC प्रबंधक डॉ. हर्षिता पटेल, नोडल अधिकारी डॉ. जिग्नेश पटाडिया सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और बड़ी संख्या में अभिभावक व बच्चे उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटिज़्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा सामान्य दिखाई देता है, लेकिन उसका व्यवहार आत्म-केंद्रित होता है। ऐसे बच्चों को समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन के जरिए मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
