सूरत : गैस संकट से सूरत के स्ट्रीट फूड पर असर, लॉरियों से गायब हो रहे कई व्यंजन
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सिलेंडर की कमी, दाम बढ़े और कोयले का सहारा लेने को मजबूर हुए विक्रेता
सूरत। मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सूरत के स्ट्रीट फूड कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है।
शहर में गैस सिलेंडर की कमी के कारण लॉरियों और रलियों पर बनने वाले कई लोकप्रिय व्यंजन धीरे-धीरे गायब हो रहे हैं, वहीं कुछ खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़ गए हैं।
सूरत, जो अपने खास खान-पान और स्ट्रीट फूड संस्कृति के लिए जाना जाता है, वहां हजारों फूड ट्रक और लॉरियां रोज़ाना लोगों को ताज़ा व्यंजन परोसती हैं।
लेकिन हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की उपलब्धता घटने से इन व्यवसायों पर सीधा असर पड़ा है। पहले जहां आसानी से सिलेंडर मिल जाते थे, अब विक्रेताओं को इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
गैस की कमी के चलते कई फूड विक्रेताओं ने रगड़ा-पैटी, गर्म भजिया और बटाका पूरी जैसी डिश बनाना बंद कर दिया है। वहीं कुछ ने लागत बढ़ने के कारण वड़ा पाव, कचौरी जैसे खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा दिए हैं।
भजिया बनाने वाले विक्रेता अब ताज़ा तलने के बजाय थोक में तैयार करने को मजबूर हैं, जिससे स्वाद और गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।
चाय के ठेलों पर भी संकट साफ नजर आ रहा है। गैस की कमी के चलते कई चाय विक्रेताओं ने अपना काम बंद कर दिया है, जबकि कुछ ने कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे चाय के स्वाद में भी बदलाव महसूस किया जा रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो छोटे विक्रेताओं की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है और कई लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा सकता है।
सूरत के प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड कारोबार पर मंडराता यह संकट न केवल व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि शहर की पहचान और स्वाद पर भी असर डाल सकता है।
