सूरत : पढ़ी-लिखी और कमाने में सक्षम होने पर भी पत्नी को गुजारा भत्ता से वंचित नहीं किया जा सकता—फैमिली कोर्ट

पति द्वारा उत्पीड़न के आरोपों के बीच अदालत ने अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 40 हजार रुपये मासिक देने का आदेश दिया

सूरत : पढ़ी-लिखी और कमाने में सक्षम होने पर भी पत्नी को गुजारा भत्ता से वंचित नहीं किया जा सकता—फैमिली कोर्ट

सूरत। पारिवारिक विवाद के एक महत्वपूर्ण मामले में नवसारी फैमिली कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर किसी महिला को गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह पढ़ी-लिखी है या कमाने में सक्षम है।

अदालत ने एक व्यवसायी पति को अपनी पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए अंतरिम तौर पर प्रति माह 40,000 रुपये देने का निर्देश दिया है।

मामले के अनुसार, नवसारी निवासी काजल चौथानी की शादी वर्ष 2010 में सूरत निवासी जय चौथानी से हुई थी (बदला हुआ नाम)। दंपत्ति के दो बच्चे हैं, जो वर्तमान में मां के साथ रह रहे हैं।

पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही पति और ससुराल पक्ष द्वारा उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। छोटी-छोटी बातों पर विवाद, अपमानजनक व्यवहार और मारपीट के आरोप भी सामने आए।

पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2024 में उसे बच्चों सहित घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद वह अपने माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हो गई। इस दौरान पति की ओर से बच्चों के पालन-पोषण या शिक्षा के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई।

इसके बाद, पत्नी ने अपनी बहन के माध्यम से नवसारी फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर की और सुनवाई में देरी को देखते हुए अंतरिम गुजारा भत्ता की मांग की।

पत्नी की ओर से अधिवक्ता प्रीति जिग्नेश जोशी ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ता के पास कोई आय का स्रोत नहीं है और दोनों बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उसी पर है, जबकि पति आर्थिक रूप से सक्षम है।

मामले की सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश डॉ. वी.सी. माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि “केवल इस आधार पर कि महिला शिक्षित है या पहले काम कर चुकी है, उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने पत्नी और दोनों बच्चों के लिए कुल 40,000 रुपये मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश पारित किया है। 

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