सूरत : नकली नोटों के पीछे 'AI' का शातिर खेल, पकड़ी गई हाई-टेक फैक्ट्री, ₹2.38 करोड़ की जाली करेंसी ज़ब्त

चीनी वेबसाइट 'अलीबाबा' से मंगाते थे सिक्योरिटी पेपर; फोटो एडिटिंग और AI सॉफ्टवेयर से असली जैसे नोट छाप रहा था मास्टरमाइंड मुकेश थुम्मर

सूरत : नकली नोटों के पीछे 'AI' का शातिर खेल,  पकड़ी गई हाई-टेक फैक्ट्री, ₹2.38 करोड़ की जाली करेंसी ज़ब्त

सूरत। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़े गए नकली करेंसी रैकेट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और विदेशी संसाधनों का इस्तेमाल कर बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस रैकेट का मास्टरमाइंड मुकेशभाई लाखाभाई थुम्मर था, जिसने सूरत में अपने घर को नकली नोट छापने की सीक्रेट फैक्ट्री बना रखा था। यहां अत्याधुनिक प्रिंटिंग सेटअप के जरिए बड़े पैमाने पर नकली नोट तैयार किए जा रहे थे।

इस पूरे मामले में विदेशी कनेक्शन भी सामने आया है। आरोपी अलीबाबा जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सिक्योरिटी थ्रेड वाले खास कागज मंगवाते थे, जिससे नोटों की क्वालिटी असली जैसी लगती थी। नकली नोटों पर ‘RBI’ और ‘भारत’ जैसे निशान भी बनाए जाते थे, जिससे आम लोगों के लिए पहचान करना मुश्किल हो जाता था।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस रैकेट में AI आधारित एडवांस्ड फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया। इन टूल्स की मदद से नोटों के डिज़ाइन और लेआउट को असली करेंसी जैसा बनाया गया, जिससे नकली नोटों के बाजार में फैलने का खतरा काफी बढ़ गया।

क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद और सूरत में एक साथ कार्रवाई करते हुए कुल ₹2.38 करोड़ की नकली करेंसी जब्त की है, जिसमें अहमदाबाद से ₹2.10 करोड़ और सूरत से ₹28 लाख शामिल हैं। इसके अलावा करीब ₹25 लाख की एक कार, सिक्योरिटी पेपर की रीम, प्रिंटर, लैपटॉप, पेपर कटिंग मशीन और नोट गिनने की मशीन भी बरामद की गई है।

इस मामले में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें सूरत से मुकेशभाई लाखाभाई थुम्मर, अशोकभाई धनजीभाई मवानी, रमेशभाई वल्लभभाई भालार, दिव्येश ईश्वरभाई राणा, प्रदीपभाई दिलीपभाई जोतांगिया और भरतभाई वलजीभाई काकड़िया शामिल हैं। कटारगाम इलाके से एक महिला आरोपी की भी गिरफ्तारी हुई है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क के अन्य लिंक तलाशे जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह रैकेट इंटरस्टेट ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल स्तर तक फैला हो सकता है। समय रहते इस गिरोह का भंडाफोड़ होने से भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर नकली नोटों की एंट्री को रोका जा सका है। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए तेजी से कार्रवाई कर रही हैं।

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