सूरत : खजोद डंपिंग साइट पर फिर भड़की आग, 52 दिन में दूसरी घटना से उठे सवाल
धुएं से घिरा शहर, ‘कचरा प्रबंधन’ पर फिर घिरी नगर निगम; साजिश की आशंका पर बहस तेज
सूरत। दक्षिण गुजरात की सबसे बड़ी मानी जाने वाली खजोद डंपिंग साइट पर एक बार फिर भीषण आग लगने से शहर में हड़कंप मच गया। महज 52 दिनों के भीतर यह दूसरी घटना है, जिसने नगर निगम की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार दोपहर अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग से उठते काले धुएं के गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिए। खजोद के आसपास के वेसू, वीआईपी रोड और अलथान जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी धुआं साफ नजर आया, जिससे लोगों में चिंता का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। हालांकि, आग की तीव्रता को देखते हुए इसे पूरी तरह नियंत्रित करने में समय लगने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी यहां लगी आग को बुझाने में फायर विभाग को करीब चार दिन का समय लगा था। उस दौरान भी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी आलोचना हुई थी और कचरे के वैज्ञानिक निपटान की कमी को जिम्मेदार ठहराया गया था।
नगर निगम द्वारा कचरा प्रोसेसिंग और डिस्पोजल पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद बार-बार लगने वाली आग ने नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कचरे के वजन और निपटान में संभावित गड़बड़ियों को छिपाने के लिए जानबूझकर आग लगाई जा रही है।
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि 52 दिन पहले लगी आग के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए, यह स्पष्ट नहीं है, और एक बार फिर वही हालात सामने आ गए हैं। ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई है।
