राजकोट : जंक फूड बना बच्चों की सेहत के लिए खतरा, राजकोट में तीन मासूमों को मिला नया जीवन

एमसीएच हॉस्पिटल में थोराकोस्कोपी और लोबेक्टॉमी से सफल इलाज, डॉक्टरों ने पौष्टिक आहार अपनाने की दी सलाह

राजकोट : जंक फूड बना बच्चों की सेहत के लिए खतरा, राजकोट में तीन मासूमों को मिला नया जीवन

छोटे  बच्चों में बढ़ता जंक और पैकेट फूड का चलन अब उनकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण राजकोट के मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ हॉस्पिटल राजकोट (एमसीएच) में देखने को मिला, जहां दो से ढाई साल के तीन बच्चों—अवनी, अमित और पृथ्वीराज—का सफल इलाज कर उन्हें नया जीवन दिया गया।

जानकारी के अनुसार, तीनों बच्चों को बार-बार होने वाले संक्रमण के चलते गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि संक्रमण बढ़कर फेफड़ों तक पहुंच चुका था और स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जयदीप गणात्रा ने बताया कि बच्चों को गंभीर निमोनिया था। दो बच्चों का आधुनिक तकनीक ‘थोराकोस्कोपी’ के माध्यम से इलाज कर छाती में जमे खून के थक्कों को निकाला गया, जबकि अवनी की हालत अधिक गंभीर होने के कारण उसके फेफड़े के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए ‘लोबेक्टॉमी’ जैसी बड़ी सर्जरी करनी पड़ी।

डॉ. गणात्रा ने बताया कि थोराकोस्कोपी एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक है, जिसमें बिना बड़ा चीरा लगाए छोटे छेद के माध्यम से कैमरा डालकर अंदर की समस्या का इलाज किया जाता है। इस पद्धति से दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है, साथ ही अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम हो जाती है।

इलाज के बाद तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और फिर से सामान्य जीवन जीते हुए खेल-कूद रहे हैं। इस सफलता में शिशु शल्य चिकित्सा विभाग की डॉ. ख्याति जेठवा, रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम, ऑपरेशन थियेटर इंचार्ज दयाबेन गजेरा, सहायक पूजा वाडोलिया सहित अन्य स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉ. जयदीप गणात्रा ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को जंक और पैकेट फूड से दूर रखें। उन्होंने कहा कि ऐसे खाद्य पदार्थों में पोषण की कमी होती है, जिससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को घर का ताजा और पौष्टिक भोजन—जैसे दाल, खिचड़ी, हरी सब्जियां, दूध और फल—दिया जाए, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके।

उल्लेखनीय है कि एमसीएच अस्पताल का शिशु शल्य चिकित्सा विभाग नवजात और छोटे बच्चों में जटिल सर्जिकल समस्याओं के उपचार में विशेषज्ञता रखता है। यहां एसोफैजियल एट्रेसिया, एनोरेक्टल मैलफॉर्मेशन, डायाफ्रामिक हर्निया, आंतों में रुकावट, हर्निया, हाइड्रोसील, अपेंडिसाइटिस और नवजात सर्जरी जैसे मामलों का इलाज एनआईसीयू के समन्वय से सफलतापूर्वक किया जाता है।

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