सूरत : "कोई श्रमिक भूखा न सोए" सचिन GIDC में शुरू हुआ 'सांझा चूल्हा', मात्र ₹25 में भरपेट भोजन 

साकेत ग्रुप और गुजरात उत्तर भारतीय सेवा संघ की अनूठी पहल; गैस किल्लत के बीच श्रमिकों को पलायन से रोकने के लिए मिलों के पास ही भोजन की व्यवस्था

सूरत :

सूरत। गैस की भारी किल्लत के कारण सूरत के औद्योगिक क्षेत्रों में उपजे संकट के बीच मानवता की एक और मिसाल सामने आई है। सचिन GIDC में भोजन की समस्या से जूझ रहे और वतन वापसी का मन बना रहे श्रमिक भाइयों को सहारा देने के लिए 'सांझा चूल्हा' कैंटीन की शुरुआत की गई है।

साकेत ग्रुप और उद्योगपति सांवरप्रसाद बुधिया की प्रेरणा से शुरू हुए इस प्रकल्प का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक और संसाधनों की तंगी के बावजूद किसी भी कामगार का चूल्हा ठंडा न रहे।

मात्र ₹25 में भरपेट भोजन और परिवार के लिए पार्सल
सचिन GIDC के रोड नंबर 2, वरुण डाइंग मिल के पास (गेट नंबर 1), नशाबंदी पुलिस स्टेशन के ठीक सामने इस सेवा केंद्र को शुरू किया गया है।

किफायती सेवा: यहाँ श्रमिकों को केवल ₹25 में शुद्ध और सात्विक भरपेट भोजन दिया जा रहा है।

पारिवारिक चिंता का समाधान: जो श्रमिक अपने कार्यस्थल पर भोजन नहीं कर सकते या जिनके घर पर पत्नी और बच्चों के लिए भोजन की समस्या है, उनके लिए यहाँ से पार्सल की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

समय और संचालन
कैंटीन में भोजन तैयार करने और परोसने का समय इस प्रकार तय किया गया है।

दोपहर का भोजन: सुबह 9:00 बजे से रसोई शुरू होगी और 12:30 बजे से भोजन परोसना शुरू कर दिया जाएगा।

रात्रि का भोजन: शाम 5:00 बजे से तैयारी शुरू होगी और रात 8:00 बजे से श्रमिक भोजन का लाभ ले सकेंगे।

साकेत ग्रुप और उत्तर भारतीय सेवा संघ का समन्वय
इस नेक कार्य के लिए साकेत ग्रुप और मार्केट के व्यापारियों ने वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन दिया है, जबकि धरातल पर श्रम और प्रबंधन का दायित्व गुजरात उत्तर भारतीय सेवा संघ संभाल रहा है। संघ के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे हमेशा सेवा कार्यों के लिए तत्पर रहते हैं और वर्तमान संकट में श्रमिकों का पलायन रोकना उनकी प्राथमिकता है।

श्रमिकों से अपील
आयोजकों ने सचिन GIDC क्षेत्र के सभी श्रमिक भाइयों से अपील की है कि जिन्हें भी वर्तमान समय में भोजन की तकलीफ है, वे बिना किसी संकोच के वरुण मिल के पास आएँ और इस सुविधा का लाभ उठाएँ। यह व्यवस्था हर रोज दोनों समय (दोपहर और रात) चालू रहेगी।

इस पहल से न केवल हजारों श्रमिकों की भूख शांत होगी, बल्कि सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मजदूरों की कमी के बड़े खतरे से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

Tags: Surat